दमोह/हटा। शासन की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना के तहत गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। ग्राम पंचायत रनेह, जनपद हटा के किसान मायाराम अहिरवार पिता मनीराम अहिरवार एक साल से अपने हक़ की राशि के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

मायाराम के खेत तालाब का कार्य जून 2023 में स्वीकृत हुआ था, जिसकी स्वीकृति राशि 3 लाख 31 हजार 448 रुपये निर्धारित की गई थी। उन्होंने बताया कि तत्कालीन पंचायत सचिव ने कहा था, पहले खुद के पैसे से काम करा लो, बाद में भुगतान हो जाएगा। सचिव की नीयत पर भरोसा कर मायाराम ने साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर तालाब निर्माण कार्य पूरा करा दिया। कार्य पूर्ण होने के बाद भी उन्हें लगभग केवल 80,000 रुपये ही प्राप्त हुए। बाकी राशि आज तक भुगतान नहीं हुई।

मायाराम ने 02 अप्रैल 2025 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दमोह को आवेदन देकर अपनी व्यथा बताते हुए लिखा, कुछ मस्टर लगाए गए हैं, पर उन्हें समय पर फिल नहीं किया जा रहा है जिसके कारण वे जीरो पर जा रहे हैं। मैंने यह कार्य अपने साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर पूरा कराया है, कृपया मुझे शेष राशि दिलाने की कृपा करें। लेकिन अफसरशाही का रवैया इतना असंवेदनशील रहा कि शिकायत करने पर उल्टा दबाव बनाया गया। मायाराम का आरोप है कि जनपद हटा के उपयंत्री और सरपंच ने कहा सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने से कुछ नहीं होगा, जब हम चाहेंगे तभी भुगतान होगा। शिकायत बंद करो तभी पैसे मिलेंगे।

अब हालात यह हैं कि सीएम हेल्पलाइन में भी इस शिकायत को फोर्स क्लोज दिखाकर बंद कर दिया गया, जबकि असली समस्या जस की तस बनी हुई है। यह मामला न केवल एक किसान की मेहनत की कमाई और हक़ से जुड़ा है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे सीएम हेल्पलाइन जैसी पारदर्शी व्यवस्था भी नीचे के स्तर पर भ्रष्टाचार के संरक्षण में बदलती जा रही है।




