रिपोर्टर – अमित शर्मा (8349348053)
दमोह में ‘अंगद के पैर’ बने अफसर, तबादला सत्र आते ही फिर कटघरे में व्यवस्था
3 साल की नीति बेअसर, 10 से 15 साल से एक ही जिले में जमे अफसरों पर उठे सवाल
दमोह। मध्यप्रदेश शासन की तबादला नीति के तहत सामान्यतः किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहना प्रावधानों के विपरीत माना जाता है, लेकिन दमोह जिले में स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है। यहां कई अधिकारी और कर्मचारी 10 से 15 वर्ष, जबकि कुछ मामलों में 20 वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। स्थानांतरण सत्र शुरू होते ही एक बार फिर यह मुद्दा प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर वर्षों से जमे इन अधिकारियों पर तबादला नीति का असर कब दिखाई देगा। जिले में ऐसे अधिकारियों की लंबी सूची बताई जा रही है, जिनका दमोह से मोह नहीं छूट रहा है।
सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब प्रदेशभर में एक समान तबादला नीति लागू है तो दमोह जिले में उसका प्रभाव क्यों नहीं दिखता। क्या प्रभावशाली पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए नियम अलग हैं, या फिर जिम्मेदार विभाग इस पर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की पकड़ मजबूत हो जाती है। समय के साथ प्रभाव, संपर्क और संरक्षण का ऐसा तंत्र विकसित हो जाता है, जिससे स्थानांतरण की प्रक्रिया भी प्रभावित होने लगती है। यही कारण है कि वर्षों से जमे कई अधिकारी आज भी उसी जिले में सेवाएं दे रहे हैं।
15 साल से नहीं बदला पदस्थापना स्थल
जिला रोजगार अधिकारी एल.पी. लड़िया करीब 15 वर्षों से दमोह में पदस्थ हैं। बताया जाता है कि उनका निवास सागर में है और वे वहीं से नियमित आवागमन करते हैं। इसके बावजूद उनकी पदस्थापना वर्षों से दमोह में ही बनी हुई है।
महिला सशक्तिकरण विभाग में 12 साल से डटे अधिकारी
जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी संजीव कुमार मिश्रा लगभग 12 वर्षों से दमोह में कार्यरत हैं। इस दौरान उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।
पीएचई में एक दशक से जमे अधिकारी
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के प्रभारी कार्यपालन यंत्री अशोक मुकाती भी करीब 10 वर्षों से जिले में सेवाएं दे रहे हैं। एसडीओ के रूप में पदस्थ हुए मुकाती वर्तमान में प्रभारी ईई की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
परिवहन अधिकारी का भी लंबा कार्यकाल
जिला परिवहन अधिकारी क्षितिज सोनी को दमोह में छह वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान वे कई बार चर्चाओं और विवादों में भी रहे।
ई-गवर्नेंस और लोक सेवा प्रबंधन में वर्षों से स्थायित्व
जिला ई-गवर्नेंस प्रभारी महेश अग्रवाल लगभग आठ वर्षों से दमोह में पदस्थ हैं। खास बात यह है कि दमोह उनका गृह जिला भी है। वहीं जिला लोक सेवा प्रबंधक चक्रेश पटेल भी करीब आठ वर्षों से जिले में कार्यरत हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी को यहीं मिला प्रमोशन
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश अहिरवार करीब 12 वर्षों से दमोह में पदस्थ हैं। इस दौरान उन्हें पदोन्नति भी मिली और वर्तमान में वे वरिष्ठ दायित्व संभाल रहे हैं।
बाबुओं का भी नहीं टूटा वर्षों पुराना ठिकाना
स्थिति केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है। जिले के कई कार्यालयों में लिपिकीय अमला भी 10 से 20 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत है। शिक्षा विभाग सहित विभिन्न कार्यालयों में ऐसे कर्मचारियों की संख्या उल्लेखनीय बताई जा रही है, जिनकी पदस्थापना वर्षों से नहीं बदली।
ये अधिकारी भी दमोह से मोह नहीं छोड़ रहे
जिला मुख्यालय पर करीब एक दर्जन से अधिक अधिकारियों का मोह दमोह से नहीं छूट रहा है। जो 5 से 8 वर्षों से दमोह में ही पदस्थ हैं। जिला सांख्यकीय अधिकारी अलका रजनी दास, प्रबंधक वेयर हाऊसिंग कापेरिशन बीएम राठौर, जिला आबकारी अधिकारी रवींद्र खरे, महाप्रधक जिला उद्योग केंद्र बीएल अहिरवार, जिला खाद्य अधिकारी माधवी बुधौलिया, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक सुशील नामदेव लंबे समय से पदस्थ हैं।
सबसे बड़ा सवाल
स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार वर्षों से जमे अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले होंगे या फिर हर साल की तरह यह सूची केवल चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगी। यदि शासन की नीति का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, तो दमोह में उसका प्रभाव दिखाई देना भी उतना ही आवश्यक माना जा रहा है।



