अफसरी रुतबा या नियमों से परे हूटर-फ्लैशर? तहसीलदार की कार में नायब तहसीलदार, राजपत्र के प्रावधानों के बीच प्रशासन कटघरे में

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रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/पटेरा। पटेरा ब्लॉक के ग्राम कुआखेड़ा बाजी के ग्रामीणों द्वारा हटा – पटेरा मार्ग पर किए गए धरना-प्रदर्शन को शांत कराने पहुंचे प्रशासनिक अमले की सरकारी कार अब कार्रवाई से ज्यादा हूटर और बहुरंगी फ्लैशर को लेकर चर्चा में है। तहसीलदार की कार में लुहारी सेक्टर के नायब तहसीलदार द्वारका गुप्ता के मौके पर पहुंचने के दौरान वाहन पर लगे हूटर और बहुरंगी फ्लैशर ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ वाहन के इस्तेमाल और उसकी वैधानिक अनुमति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हूटर और बहुरंगी फ्लैशर सामान्य सरकारी वाहन पर लगे ऐसे उपकरण नहीं हैं, जिनका इस्तेमाल केवल पद या प्रशासनिक हैसियत के आधार पर किया जा सके। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में इनके उपयोग को लेकर स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं।
राजपत्र का नियम—बहुरंगी फ्लैशर के लिए विशेष श्रेणी जरूरी
केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108(4) के अनुसार लाल, नीली और सफेद रंग की बहुरंगी लाइट केवल उन वाहनों पर अनुमत है, जो आपातकालीन ड्यूटी के लिए विशेष रूप से नामित हों और जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से निर्दिष्ट किया गया हो। यानी केवल यह तथ्य कि वाहन सरकारी है या उसमें कोई प्रशासनिक अधिकारी बैठा है, अपने आप में बहुरंगी फ्लैशर के इस्तेमाल की अनुमति का आधार नहीं बनता। 
यहीं से कुआखेड़ा बाजी की घटना में सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—
क्या तहसीलदार की उक्त कार राज्य सरकार द्वारा आपातकालीन ड्यूटी के लिए विशेष रूप से नामित वाहन है?
यदि हां, तो संबंधित वाहन को लेकर जारी आदेश या अधिसूचना क्या है?
और यदि वाहन ऐसी श्रेणी में नामित नहीं है, तो फिर उस पर बहुरंगी फ्लैशर किस अनुमति के आधार पर लगा और इस्तेमाल हुआ?
हूटर भी सवालों के घेरे में
मामला सिर्फ बहुरंगी लाइट तक सीमित नहीं है। हूटर/मल्टी-टोन सायरन के इस्तेमाल को लेकर भी नियमों में प्रावधान हैं। मोटर व्हीकल ड्राइविंग रेगुलेशन, 2017 के रेगुलेशन 27 के अनुसार राज्य सरकार द्वारा आपातकालीन सेवाओं के लिए नामित वाहन का चालक मल्टी-टोन हॉर्न यानी सायरन और मल्टी-कलर फ्लैशर का संचालन तभी करेगा, जब वाहन किसी आपातकालीन कॉल या अलार्म का जवाब दे रहा हो। ऐसे में सवाल सीधा है—कुआखेड़ा बाजी में ग्रामीणों के धरने को शांत कराने पहुंचना क्या उस समय नियम में वर्णित आपातकालीन कॉल या अलार्म का जवाब देना था?इसका स्पष्ट उत्तर प्रशासन की ओर से ही सामने आना चाहिए। 
धरना शांत कराने पहुंचे थे अधिकारी, लेकिन चर्चा में आ गई गाड़ी
ग्रामीणों का धरना शांत कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारी का मौके पर पहुंचना अपने आप में प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन जब अधिकारी के पहुंचने वाले वाहन पर बहुरंगी फ्लैशर और हूटर नजर आए, तो चर्चा का केंद्र ही बदल गया। अब सवाल ग्रामीणों के धरने से आगे बढ़कर सरकारी वाहन के विशेषाधिकार और उसके वैधानिक उपयोग तक पहुंच गया है। प्रशासन आम नागरिकों को मोटर वाहन नियमों का पालन कराने के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जो नियम आम वाहन चालकों के लिए लागू हैं, क्या उन्हीं नियमों के तहत प्रशासनिक वाहनों की भी जांच और जवाबदेही तय होती है?
‘सरकारी वाहन’ क्या नियमों से ऊपर है?
कुआखेड़ा बाजी की घटना ने एक बुनियादी सवाल सामने ला दिया है—क्या किसी वाहन पर हूटर और बहुरंगी फ्लैशर केवल इसलिए लगाया या इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि वह किसी प्रशासनिक अधिकारी के उपयोग में है ? नियम 108(4) बहुरंगी लाल-नीली-सफेद लाइट के लिए विशेष रूप से नामित आपातकालीन वाहन की शर्त रखता है। वहीं 2017 के ड्राइविंग रेगुलेशन में सायरन और फ्लैशर के संचालन को आपातकालीन कॉल/अलार्म के जवाब से जोड़ा गया है। इसलिए अब प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है कि संबंधित वाहन इन प्रावधानों के दायरे में किस आधार पर आता है।
अफसरी रुतबा नहीं, नियमों की कसौटी पर होना चाहिए वाहन
प्रशासनिक पद की गरिमा अपनी जगह है, लेकिन सड़क पर किसी वाहन को विशेष अधिकार मिलने का आधार पद का प्रभाव नहीं, बल्कि नियम और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति होना चाहिए।कुआखेड़ा बाजी में जिस उद्देश्य से अधिकारी पहुंचे थे, वह अलग विषय है। लेकिन उनके पहुंचने वाले वाहन पर लगे हूटर और बहुरंगी फ्लैशर ने अब प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब प्रशासन से इन सवालों के जवाब जरूरी
• संबंधित कार पर बहुरंगी फ्लैशर लगाने की अनुमति किस सक्षम प्राधिकारी ने दी?
• क्या यह वाहन राज्य सरकार द्वारा आपातकालीन ड्यूटी के लिए विशेष रूप से नामित है?
• वाहन में हूटर/मल्टी-टोन सायरन लगाने और इस्तेमाल की अनुमति किस आदेश के तहत है?
• कुआखेड़ा बाजी जाते समय ऐसी कौन-सी आपातकालीन स्थिति थी, जिसके कारण हूटर और फ्लैशर का इस्तेमाल आवश्यक हुआ?
• क्या संबंधित वाहन का इस्तेमाल केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108(4) और मोटर व्हीकल ड्राइविंग रेगुलेशन, 2017 के रेगुलेशन 27 के अनुरूप किया गया?
बवाल के बीच अब जवाबदेही का इंतजार
कुआखेड़ा बाजी में ग्रामीणों के धरने को शांत कराने पहुंचे प्रशासनिक अमले की कार्रवाई के बीच हूटर और बहुरंगी फ्लैशर ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। मामला किसी अधिकारी के मौके पर पहुंचने का नहीं, बल्कि विशेष लाइट और सायरन के इस्तेमाल की वैधानिकता का है। राजपत्र के प्रावधान जहां बहुरंगी फ्लैशर को विशेष रूप से नामित आपातकालीन वाहनों से जोड़ते हैं, वहीं ड्राइविंग रेगुलेशन इसके इस्तेमाल को आपातकालीन कॉल या अलार्म के जवाब से जोड़ता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले में संबंधित वाहन की अधिकृत श्रेणी, हूटर-फ्लैशर की अनुमति और मौके पर इनके इस्तेमाल की परिस्थितियों को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है। क्योंकि सवाल सिर्फ हूटर और चमकती बहुरंगी लाइट का नहीं—सवाल यह है कि सड़क पर नियम सबके लिए समान हैं या अफसरी रुतबे के साथ उनकी परिभाषा भी बदल जाती है?

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