जनपद पंचायत बटियागढ़ में फर्जी हिंदी टाइपिंग प्रमाणपत्र का खेल? सुरेंद्र कुमार प्रजापति पर उठे गंभीर सवाल

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रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/बटियागढ़। दमोह जिले की जनपद पंचायत बटियागढ़ एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला कथित कूटरचित हिंदी टाइपिंग प्रमाणपत्र के आधार पर लाभ लेने से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि सहायक ग्रेड-3 पद पर पदस्थ सुरेंद्र कुमार प्रजापति द्वारा प्रस्तुत हिंदी टाइपिंग प्रमाणपत्र संदिग्ध बताया जा रहा है, जिसकी प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब यह मामला केवल दस्तावेजों में कथित हेरफेर का मामला नहीं होगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव है? चर्चा यह भी है कि जनपद पंचायत में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कुछ अधिकारी और कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से कार्य करते रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित हुई हैं।
आरोप है कि यदि समय रहते दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता, तो कथित फर्जीवाड़े की नौबत ही नहीं आती। इसके बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न होना संदेह को और गहरा कर रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या वर्षों से पदस्थ अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखीं, या फिर पूरे मामले में अंदरूनी संरक्षण दिया गया?
वही इस मामले के संबंध में पूर्व में भी जांच की प्रक्रिया हुई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सार्वजनिक नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जिला पंचायत सीईओ द्वारा कथित लेनदेन के चलते मामला रफादफा कर दिया गया। जिसकी वजह से जांच के आदेशों को भी कथित मैनेजमेंट कर रफा दफा कर दिया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। अब इस मामले के साथ साथ तत्कालीन जांच से जुड़े अधिकारियों और जिला पंचायत स्तर पर हुई कार्रवाई की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी। यदि जांच में फर्जी प्रमाणपत्र का उपयोग सिद्ध होता है, तो संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होना आवश्यक होगी, जिन्होंने दस्तावेजों का सत्यापन किया या कथित अनियमितताओं के बावजूद कार्रवाई नहीं की।
अब सवाल स्पष्ट है—
  • क्या जनपद पंचायत बटियागढ़ में वर्षों से जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी जांच होगी?
  • क्या कथित फर्जी हिंदी टाइपिंग प्रमाणपत्र की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी?
  • क्या पूर्व में हुई कथित जांच और उसमें हुई कार्रवाई की भी निष्पक्ष समीक्षा होगी?
  • क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला फिर फाइलों में दब जाएगा?

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