रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/पटेरा। पटेरा जनपद की ग्राम पंचायत धनगुवां इन दिनों एक के बाद एक विवादों के चलते सुर्खियों में है। आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर कागजों में योजनाएं पूरी दिखाई जा रही हैं, जबकि धरातल पर तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने सरकारी धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार पांचवें राज्य वित्त आयोग से लगभग 3 लाख रुपए की पुलिया स्वीकृत हुई थी। जिसमें से कि 2 लाख 69 हजार रुपए की राशि आहरित होने के बावजूद मौके पर पुलिया का कोई निर्माण नहीं मिला। जब मामला मीडिया में प्रमुखता से उठा तो कथित रूप से पुलिया की जगह एक साधारण नाली बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। जिस कार्य में पहले ही लाखों रुपए खर्च दिखाए जा चुके थे, उसी कार्य में बाद में लेबर और मिस्त्री के नाम पर करीब 30 हजार रुपए का पुनः भुगतान भी कर दिया गया। इससे भुगतान प्रक्रिया और निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी बीच सरपंच प्रतिनिधि संतोष यादव की कथित दबंगई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से विवाद और गहरा गया है। आरोप है कि पंचायत के कामकाज में निर्वाचित सरपंच सियारानी की बजाय उनके परिजन संतोष यादव की भूमिका अधिक प्रभावी है, जिससे पंचायत राज व्यवस्था की भावना पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि पुलिया स्वीकृत थी तो बनी कहां ? यदि बाद में नाली बनाई गई तो लाखों रुपए किस मद में खर्च हुए ? और यदि इस पूरे निर्माण कार्य में बंदरबाट हुआ हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी? ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, वित्तीय ऑडिट और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।



