रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/हटा। नवरात्रि के पावन अवसर पर हटा थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक भगवानदास दाहिया ने सुनार नदी के निर्मल जल में 10 किलो का गदा लेकर जलयोग साधना कर मां दुर्गा की आराधना का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। पिछले 25 वर्षों से वे जलयोग कर साधना कर रहे हैं। इस विशेष अवसर पर उनकी साधना को देखने कई श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचे और दिव्य वातावरण का अनुभव किया। प्रधान आरक्षक ने बताया कि नवरात्रि शक्ति उपासना का पर्व है, जिसमें साधक मां दुर्गा से ऊर्जा और बल प्राप्त करता है। उनका मानना है कि जलयोग से मन, शरीर और आत्मा शुद्ध होकर दिव्य ऊर्जा से जुड़ते हैं। यही कारण है कि वे हर वर्ष नवरात्रि पर विशेष रूप से जलयोग करते हैं। उनकी वीरता और समर्पण को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा उन्हें वीर पुरस्कार और भारत सरकार द्वारा योग पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान आरक्षक की यह अनूठी परंपरा पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। पुलिस वर्दी में रहते हुए भी उन्होंने अध्यात्म और आस्था को अपने जीवन का आधार बनाया है। सुनार नदी के तट पर नवरात्रि के दौरान किए गए इस जलयोग से वातावरण में दिव्यता और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां दुर्गा के जयकारों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने साधना को और भी पावन बना दिया।




