अमित शर्मा की खास रिपोर्ट (83493 48053),
दमोह/तेंदूखेड़ा। दमोह जिले की पंचायतों में व्याप्त भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है, आय दिन जिले के पंचायतों के घटिया निर्माण के साथ बंदरबाट का खेल सुर्खियों में बना रहता है, ऐसा ही मामला तेंदूखेड़ा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत धनगौर से सामने आया है। जहां वर्ष 2022-23 के दौरान स्वीकृत तालाब नवीनीकरण योजना का मामला अब भ्रष्टाचार की बदबू से भर चुका है। योजना का उद्देश्य था ग्रामीणों को जलसंचय की सुविधा देना, लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के तहत स्वीकृत इस कार्य के लिए कुल ₹26,13,000 की राशि स्वीकृत की गई थी (वर्क कोड: 1711007/WC/22012034943774)। पहले ₹15,71,000 की राशि निकाल ली गई, अब हाल ही में ₹10,42,000 और निकाल ली गई। कुल राशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत देखें तो तालाब का काम न केवल अधूरा है, बल्कि देखने लायक भी नहीं।
लीपापोती से भरा कार्य, एस्टीमेट को ताक पर रखकर घोटाला
तालाब का निर्माण कार्य न तो एस्टीमेट के अनुसार किया गया और न ही कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की गई। जगह-जगह मिट्टी भराव अधूरा है, कटाव सुरक्षा का नामोनिशान नहीं है और पिचिंग कार्य पूरी तरह गायब है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह कार्य महज कागजों में पूरा दिखाकर, लाखों की बंदरबांट का जरिया बना दिया गया।
पूर्व जनपद सदस्य एवं वर्तमान मंडल अध्यक्ष संत कुमार पाल और पूर्व SDO बी.एल. साहू पर आरोपों की बौछार
इस योजना का कार्य पूर्व बीडीसी एवं वर्तमान मंडल अध्यक्ष संत कुमार पाल के द्वारा कराया गया है और वहीं इस दौरान तत्कालीन SDO बी.एल. साहू रहे है, जिनके सम्पूर्ण कार्य लगभग गुणवत्ताहीन ही रहे है। वही अब यह भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आने के बाद अब ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से खेला गया, जिसमें बिना काम के भुगतान किया गया और जमीनी स्तर पर काम ठप पड़ा है।
सरकारी धन की लूट पर चुप्पी क्यों…जांच क्यों नहीं?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पैसा निकल गया, कार्य अधूरा है, तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? क्या ये सरकारी धन की खुली लूट नहीं है? जिससे कही ना कही इसमें जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत भी प्रतीत होती है, क्योंकि दमोह जिले में जिस तरह से भ्रष्टाचार की जड़े पनप रही है, उसमें बिना अधिकारियों के संरक्षण के बगैर यह संभव ही नहीं है, अब देखने वाली बात होगी, कि खबर प्रकाशित होने के बाद भी कोई कार्यवाही होती है, या मामला यूं ही फाइलों में सिमटकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, जो कि देखना लाजमी होगा।
ग्रामवासी बोले – “तालाब नहीं, यह तो भ्रष्टाचार का दलदल है
ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है: “तालाब बनना था, लेकिन बना घोटाले का गड्ढा। हर साल ये योजनाएं सिर्फ जेबें भरने का जरिया बन गई हैं। हमारे गांव की समस्याएं जस की तस हैं। अधिकारी और नेता सिर्फ पैसा डकारने में व्यस्त हैं।”
मांग – जांच कर दोषियों पर हो कार्यवाही
गांव के जागरूक नागरिकों ने इस घोटाले की जांच की मांग की है और जल्द कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों का आरोप है, कि पंचायतों में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर लगाम कसना जरूरी है, अन्यथा शासन की योजनाओं का पैसा यूं ही बर्बाद होता रहेगा और विकास के ना के बराबर होगा। तमाम अपडेट के लिए जुड़े रहिए खबर मप्र न्यूज के साथ…क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है




