दमोह। दमोह जिले के हटा ब्लॉक के हिनौता विद्युत वितरण केंद्र एक बार फिर विवादों में है। यहां पदस्थ कनिष्ठ अभियंता पर गंभीर आरोपों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब सवाल उठ रहे है, कि आखिर प्रशासन क्यों मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहा है? युवक बलराम अहिरवार का आरोप है कि कनिष्ठ अभियंता की मनमानी चरम पर हैं। उपभोक्ताओं को झूठे बिजली चोरी प्रकरणों में फँसाना, विभागीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाना और प्रकरण बनाकर रिश्वत की मांग करना आम बात हो गई है। उन्हें भी फर्जी बिजली चोरी का केस बनाकर नेशनल लोक अदालत का नोटिस भेजा गया है, जबकि ना उनके नाम से कोई कृषि भूमि है और ना कोई विद्युत कनेक्शन, बल्कि इनके पिता के नाम से बाकायदा स्थायी कनेक्शन है, इसके बावजूद जे. ई प्रदीप पटेल ने फर्जी विद्युत चोरी का प्रकरण बनाया है, जिससे मेरा कोई ताल्लुकात नहीं है। वही नोटिस के बाद हटा न्यायालय में आयोजित दिनांक 13 सितंबर 2025 को नेशनल लोक अदालत में युवक ने जे.ई को आवेदन देकर मामले की जानकारी दी है। वही पीड़ित बलराम का कहना है, कि अगर इस मामले में उचित कार्यवाही नहीं होती है, तो वे कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में जाएंगे। यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही नजर आ रही है जैसी हाल ही में पूर्व में कनिष्ठ अभियंता प्रदीप पटेल पर लगे आरोपों के दौरान हुई थी। उस समय भी भ्रष्टाचार, पक्षपात और द्वेषपूर्ण कार्रवाई जैसे मामले सुर्खियों में रहे थे। मगर प्रशासन ने ठोस कार्यवाही करने की बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब ग्रामीण और उपभोक्ता खुलकर प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं? क्या विद्युत विभाग के ऐसे अभियंताओं पर अंकुश लगाने की हिम्मत प्रशासन खो चुका है? क्या आम जनता को लगातार परेशान करने और रिश्वतखोरी का यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा? जनता का कहना है कि विद्युत विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी पर यदि जल्द लगाम नहीं कसी गई तो इसका खामियाजा अन्य उपभोक्ताओं को भी भुगतना पड़ सकता है।




