सरोद सेवा सहकारी समिति का कथित ₹2.50 करोड़ खरीदी घोटाला फिर चर्चा में, ब्लैंक चेक, अवैध वसूली और राजनीतिक संरक्षण के आरोप

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जबलपुर जिले के पाटन ब्लॉक अंतर्गत सरोद सेवा सहकारी समिति एक बार फिर कथित खरीदी घोटाले को लेकर चर्चा में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2014-15 में गेहूं-धान खरीदी के दौरान तत्कालीन ऑपरेटर संदीप दुबे, केंद्र प्रभारी मेहरबान सिंह ठाकुर और प्रबंधक विश्वनाथ गोटिया के कार्यकाल में करीब ₹2.50 करोड़ का कथित खरीदी घोटाला हुआ।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों के संचालकों से ब्लैंक चेक लिए गए, लेकिन उनके बदले भुगतान नहीं किया गया। उनका दावा है कि आरोपों के समर्थन में वे शपथ-पत्र (एफिडेविट) देने को तैयार हैं और चार समूहों के एफिडेविट भी तैयार किए जा चुके हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उचित मूल्य की दुकानों के आवंटन के नाम पर स्वयं सहायता समूहों से ₹50 हजार से ₹1 लाख तक की कथित अवैध वसूली की गई। इस मामले में तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर आभा शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दीपक कुशवाहा ने महिला स्वयं सहायता समूहों की आड़ में कथित रूप से संदीप दुबे के साथ मिलकर करीब ₹80 लाख की अवैध वसूली कराई। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित रूप से बैंकों से सांठगांठ कर ₹2 करोड़ के मामले को प्रभावित कराया गया।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि पंचर की दुकान से शुरुआत करने वाले व्यक्ति के पास आज करोड़ों रुपये की संपत्ति कैसे बनी। उन्होंने संबंधित संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की है।
इसके अलावा शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूरे मामले को राजनीतिक संरक्षण मिला, जिसके कारण वर्षों तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हम इस खबर की कोई भी अधिकारी पुष्टि नहीं करते हैं 

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