रिपोर्ट – शरद गर्ग (जबलपुर)
जबलपुर। जबलपुर शहर में सट्टा अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम और बेखौफ खेला जा रहा है। गली-मोहल्लों से लेकर बाजार और व्यस्त चौराहों तक सट्टा माफिया ने अपनी जड़ें इस कदर फैला ली हैं कि कानून का भय पूरी तरह खत्म हो चुका है। सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि पुलिस को सब कुछ मालूम होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव बना हुआ है, जिससे खाकी की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। सूत्रों की मानें तो शहर के कई इलाकों में तय समय और तय स्थानों पर सट्टा पर्चियां कटती हैं। मोबाइल और ऑनलाइन सट्टे के जरिए रोज़ाना लाखों रुपये का लेन-देन हो रहा है। थानों के आसपास भी सट्टे का खेल बेरोकटोक जारी है, लेकिन पुलिस की ओर से न छापे पड़ते हैं और न ही सट्टा संचालकों पर कोई ठोस शिकंजा कसा जा रहा है।
सट्टे के इस बेशर्म कारोबार ने शहर के युवाओं को तेजी से बर्बादी की ओर धकेल दिया है। मेहनत की कमाई पलभर में उड़ रही है, घर-परिवार उजड़ रहे हैं और कर्ज, नशा व अपराध की राह खुलती जा रही है। जानकारों का कहना है कि सट्टे से पैदा हो रहा काला धन जबलपुर में बढ़ते अपराधों की बड़ी वजह बनता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार सट्टा अड्डों की पूरी जानकारी पुलिस को दी गई, लेकिन हर बार या तो आंखें मूंद ली गईं या दिखावटी कार्रवाई कर मामला रफा-दफा कर दिया गया। इससे सट्टा माफिया के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि वे अब किसी से डरने को तैयार नहीं हैं। आमजन में यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह काला साम्राज्य फल-फूल रहा है ?अब हालात ऐसे बन गए हैं कि यदि तत्काल कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो सट्टा माफिया शहर की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह निगल सकता है। जनता मांग कर रही है कि वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले में सीधी दखल दें, सट्टा माफिया की कमर तोड़ी जाए और यदि खाकी में बैठे किसी भी जिम्मेदार की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसे भी बेनकाब कर सख्त सजा दी जाए। जब तक दोषियों पर सीधी चोट नहीं होगी, तब तक जबलपुर सट्टा माफिया की गिरफ्त से आज़ाद नहीं हो पाएगा।




