रिपोर्ट – अमित शर्मा (दमोह)
दमोह/पटेरा। पटेरा तहसील मुख्यालय में प्रशासनिक मर्यादाएं तार-तार होती नजर आ रही हैं। यहां पदस्थ पटवारी धर्मेंद्र चक्रवर्ती अपने मूल कर्तव्यों को दरकिनार कर तहसीलदार उमेश तिवारी के साथ पूरे तहसील क्षेत्र में घूम-घूमकर ‘तहसीलदारी’ करते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि वे तहसीलदार के कार्यों में सुविधा शुल्क की वसूली का सक्रिय माध्यम बने हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि स्थानांतरण और उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद आज तक उन्हें भारमुक्त नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार, पटवारी धर्मेंद्र चक्रवर्ती का करीब छह माह पूर्व पटेरा से तेंदूखेड़ा स्थानांतरण हो चुका था। बाद में राजनीतिक व अन्य प्रभावों के जरिए स्थानांतरण में संशोधन कराकर तेंदूखेड़ा की जगह हटा करा लिया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की, जिसे खारिज करते हुए कलेक्टर को निर्णय लेने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने याचिका निरस्त कर तत्काल तबादला आदेश का पालन करने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद आज तक पटवारी को पटेरा से भारमुक्त नहीं किया गया।
तहसीलदार का संरक्षण, नियमों की अनदेखी
आरोप है कि पटवारी धर्मेंद्र चक्रवर्ती को वर्तमान तहसीलदार उमेश तिवारी का पूर्ण संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि वे अपने पटवारी हल्के का काम छोड़कर तहसीलदार के साथ अन्य हल्कों के निरीक्षण और दौरों में लगातार नजर आते हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा सुविधा शुल्क की वसूली पटवारी के माध्यम से कराई जा रही है। इसी कड़ी में सोमवार को तहसीलदार द्वारा खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जहां पटवारी द्वारा केंद्र प्रभारियों से सुविधा शुल्क वसूली की शिकायतें भी सामने आई हैं।
आम जनता परेशान, शिकायतें बेअसर
इधर पटेरा के निवासी अपने रोजमर्रा के राजस्व कार्यों को लेकर लगातार परेशान हैं। बताया जा रहा है कि कई लोगों ने 181 हेल्पलाइन पर शिकायतें भी दर्ज कराईं, लेकिन तहसीलदार के नजदीकी होने का लाभ उठाकर शिकायतों को बिना निराकरण के ही बंद कर दिया गया।
कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
पटेरा के नागरिकों ने कलेक्टर से मांग की है कि पटवारी धर्मेंद्र चक्रवर्ती को तत्काल पटेरा से भारमुक्त कर उनके स्थान पर अन्य पटवारी की नियुक्ति की जाए। साथ ही, तहसीलदार के साथ मिलकर नियमविरुद्ध तरीके से कार्य और वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
सवालों के घेरे में प्रशासन
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उच्च न्यायालय और कलेक्टर के आदेश स्पष्ट हैं, तो आखिर किसके संरक्षण में आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बन सकता है।




