फसलों में इल्लियों का कहर: समय पर रोकथाम से बचाएंगे किसान अपनी मेहनत की कमाई 

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रिपोर्ट : उदय सिंह लोधी (विशेष संवाददाता)
दमोह। किसानों के लिए इल्लियाँ हर साल बड़ी समस्या बनकर सामने आती हैं। ये फसल की पत्तियों को चट कर उत्पादन में भारी गिरावट का कारण बनती हैं। कीट विज्ञान विभाग, कृषि महाविद्यालय पन्ना के डॉ. द्वारका का कहना है कि यदि किसान समय पर रोकथाम के उपाय करें, तो फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि खेत की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। शुरुआती अवस्था में ही इल्लियों की पहचान कर अंडों और लार्वा को हाथ से चुनकर नष्ट करें। साथ ही खेत में ‘टी’ आकार की लकड़ियाँ लगाएँ, ताकि पक्षी बैठकर इल्लियों को खा सकें। नीम आधारित कीटनाशक 1 से 2 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करने पर यह सुरक्षित और असरदार साबित होता है। डॉ. द्वारका ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें और हमेशा कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही खुराक तय करें। इमामेक्टिन बेंजोएट 80 से 100 ग्राम प्रति एकड़ या प्रोफेनोफोस 1 से 2 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना प्रभावी माना गया है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि जैविक और रासायनिक तरीकों का संतुलित उपयोग करके इल्लियों पर काबू पाया जा सकता है, जिससे फसल सुरक्षित रहेगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। 

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