एमडीएम में ‘वसूली सिंडिकेट’ का आरोप! क्या प्रभारी के नाम पर चालक चला रहा था पूरा खेल? समूह संचालक महिलाओं के गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप

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रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह। जिले की मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। एमडीएम प्रभारी समन्वयक पी.एस पांडेय के वाहन चालक विनोद साहू पर विभागीय मामलों में कथित हस्तक्षेप, अवैध वसूली और कार्रवाई का भय दिखाकर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। अब मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाली कई स्व-सहायता समूह संचालक महिलाओं ने भी आरोप लगाया है कि उनसे कथित रूप से पैसे मांगे जाते थे और रकम नहीं देने पर समूह हटाने अथवा विभागीय कार्रवाई कराने की धमकी दी जाती थी। 
सूत्रों के अनुसार, विभागीय निरीक्षणों, प्रतिवेदनों और अन्य संवेदनशील जानकारियों का कथित रूप से “मैनेजमेंट” और “वसूली सिंडिकेट” के लिए उपयोग किया जाता था। पूर्व में विभाग से जुड़ी कुछ व्हाट्सएप चैट भी चर्चा में रही थीं, जिनमें निरीक्षण और कार्रवाई से संबंधित बातचीत होने के दावे किए गए थे। इन चैट्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जिले भर में चर्चाओ का बाजार गरम रहा।
आरोप यह भी हैं कि विभागीय आदेश और अन्य दस्तावेज कथित रूप से वाहन चालक द्वारा विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में साझा किए जाते रहे और संगठनात्मक मामलों में भी उसकी सक्रिय भूमिका दिखाई देती रही। इससे यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर एक वाहन चालक विभागीय आदेशों, निरीक्षणों और प्रशासनिक मामलों में इतनी कथित सक्रिय भूमिका किस अधिकार से निभा रहा था?
पूरे घटनाक्रम के बाद एमडीएम प्रभारी पी. एस पांडेय और उनके चालक विनोद साहू की कार्यप्रणाली को लेकर विभाग में चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि लगाए जा रहे आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो मामला केवल विभागीय अनुशासन का नहीं बल्कि शासकीय योजना में कथित अनधिकृत हस्तक्षेप, प्रभाव के दुरुपयोग और संभावित वसूली तंत्र की निष्पक्ष जांच का विषय भी बन सकता है। इस संबंध में एमडीएम प्रभारी समन्वयक प्रभुशंकर पांडेय से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। 
जवाब मांगते सवाल…
  • क्या एमडीएम योजना में पर्दे के पीछे कोई कथित वसूली तंत्र सक्रिय था?
  • एक वाहन चालक को विभागीय मामलों में इतनी कथित ताकत और हस्तक्षेप का अधिकार किसने दिया?
  • समूह संचालक महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी?
  • यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?

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