- रिपोर्टर : अमित शर्मा (8349348053)
मझौली/जबलपुर। मझौली उपार्जन घोटाले में एक के बाद एक एफआईआर, निलंबन और जांच की कार्रवाई सामने आ रही है, लेकिन लमकना समिति के ऑपरेटर बृजकिशोर यादव को लेकर प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। क्षेत्र में चर्चा है कि जब उपार्जन व्यवस्था से जुड़े कई अधिकारी, कर्मचारी और अन्य लोग कार्रवाई की जद में आ चुके हैं, तो फिर बृजकिशोर यादव पर अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि खरीदी केंद्रों में ऑपरेटर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक होती है। पोर्टल एंट्री, रिकॉर्ड संधारण और खरीदी से जुड़े तकनीकी कार्यों में ऑपरेटर की सीधी भागीदारी रहती है। ऐसे में यदि पूरे उपार्जन तंत्र की जांच हो रही है, तो ऑपरेटर की भूमिका को नजरअंदाज करना कई सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के अनुसार, बृजकिशोर यादव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने संबंधी आदेशों की चर्चा भी प्रशासनिक गलियारों में रही, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसी वजह से क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या जांच सभी के लिए समान है या फिर कुछ लोगों को विशेष संरक्षण प्राप्त है? यदि जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि जांच जारी है तो उसकी प्रगति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
मझौली उपार्जन घोटाले में कार्रवाई की रफ्तार और चयनात्मक रवैये को लेकर अब ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई देने लगी है। लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच का मतलब केवल कुछ लोगों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की जवाबदेही तय करना है।
फिलहाल बृजकिशोर यादव के खिलाफ किसी अपराध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी सक्षम जांच एजेंसी ने उन्हें दोषी ठहराया है। लेकिन एक के बाद एक उठते सवालों ने प्रशासन की निष्पक्षता पर बहस जरूर छेड़ दी है।



