कलेक्टर के आदेश को ठेंगा, भ्रष्ट अफसरों की चांदी: दमोह में 12.79 करोड़ का सड़क घोटाला तीन महीने से जांच के नाम पर दफन

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रिपोर्ट – अमित शर्मा (8349348053)
दमोह। दमोह जिले में पंचायत विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का ऐसा खुला खेल सामने आया है, जिसने प्रशासनिक ईमानदारी की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा ग्राम सड़क योजना के तहत 77 पुरानी सड़कों के रिनोवेशन के नाम पर 12 करोड़ 79 लाख रुपये का महाघोटाला अंजाम दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तीन महीने बीतने के बाद भी जांच सिर्फ कागजों में कैद है। जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल द्वारा की गई 20 गंभीर शिकायतों के बावजूद न तो जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हुई और न ही दोषियों तक पहुंचने की कोई ठोस कोशिश दिखाई दे रही है। यह पूरा मामला अब प्रशासनिक संरक्षण में पल रहे भ्रष्टाचार की बानगी बन चुका है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि 77 में से 20 सड़क कार्य ऐसे हैं, जिनकी कोई प्रशासकीय स्वीकृति ही नहीं ली गई, फिर भी नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। सवाल उठता है कि बिना स्वीकृति डीपीआर किसने फीड की? भुगतान की फाइलें किन-किन टेबलों से होकर गुजरीं? जिम्मेदार अफसरों पर अब तक कानूनी शिकंजा क्यों नहीं कसा गया? इन सवालों पर विभागीय अफसरों की हालत ऐसी है मानो सांप सूंघ गया हो।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने 24 अक्टूबर को दो जांच दल गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट देने के स्पष्ट आदेश दिए थे, लेकिन आज तीन महीने बाद भी जांच रिपोर्ट का अता-पता नहीं है। इससे बड़ा प्रशासनिक मजाक और क्या हो सकता है? जांच दल के प्रमुख अनिल आठ्या (ईई, पीडब्ल्यूडी) का यह कहना कि “अभी जांच शुरू ही नहीं हुई”, सीधे-सीधे कलेक्टर के आदेश की अवहेलना और भ्रष्टाचारियों को खुला संरक्षण देने जैसा है। वहीं दूसरे जांच प्रभारी देवेंद्र साहू का फोन तक न उठाना यह संकेत देता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। अब जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उन्होंने इस पूरे घोटाले को जिला पंचायत की आगामी बैठक में प्रस्ताव के रूप में रखने की तैयारी कर ली है। पुरानी सड़कों के रिनोवेशन के नाम पर हुआ यह 12.79 करोड़ का खेल अब सिर्फ एक आर्थिक घोटाला नहीं रहा, बल्कि यह दमोह के प्रशासनिक इकबाल, जवाबदेही और पारदर्शिता पर लगा गहरा धब्बा बन चुका है। अब सवाल यह है कि क्या जांच आगे बढ़ेगी या फाइलों में ही दम तोड़ देगी?

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