रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/पटेरा। जनपद पंचायत पटेरा अब प्रशासनिक संवेदनहीनता का पर्याय बनता जा रहा है। कार्यालय प्रांगण में मृत नंदी गौवंश का लंबे समय तक पड़े रहना किसी एक कर्मचारी की चूक नहीं, बल्कि सीधा-सीधा जनपद पंचायत की विफल नेतृत्व शैली का प्रमाण है। यह घटना बताती है कि पटेरा जनपद बिना निगरानी, बिना जवाबदेही और बिना संवेदना के चल रहा है। जहां एक ओर शासन गौवंश संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत के मुख्यालय में ही नंदी गौवंश का शव सड़ता रहा। दुर्गंध फैलती रही, अधिकारी-कर्मचारी आते-जाते रहे, आम नागरिक परेशान होते रहे—लेकिन सीईओ समेत पूरा प्रशासन मौन बना रहा। न पशु चिकित्सा विभाग को सूचना, न नगर परिषद को खबर, न ही किसी कार्रवाई के निर्देश। यह लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक पतन की पराकाष्ठा है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जनपद पंचायत पटेरा सीईओ हलधर मिश्रा पूरी तरह नदारद नजर आए। जब इस संवेदनशील और शर्मनाक घटना पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा। सवाल उठता है—क्या जनपद पंचायत किसी अदृश्य सीईओ के भरोसे चल रही है या फिर जवाबदेही से बचना अब उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।
गौरतलब है कि सीईओ का पूर्व कार्यकाल भी हमेशा संदेह और विवादों में घिरा रहा है। आरोप रहे हैं कि वे कार्यालय में गिने-चुने दिन ही उपस्थित रहते हैं और अधिकतर समय अनुपस्थित रहते हुए भी व्यवस्था पर पकड़ होने का दावा किया जाता रहा। अब इस घटना ने उन आरोपों को और मजबूती दे दी है। यदि सीईओ नियमित रूप से कार्यालय में रहते, निरीक्षण करते और कर्मचारियों को जवाबदेह बनाते, तो जनपद कार्यालय प्रांगण में ऐसी अमानवीय स्थिति कभी पैदा ही नहीं होती। स्थानीय नागरिकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है। लोगों का कहना है कि यह घटना केवल एक मृत नंदी की नहीं, बल्कि एक लापरवाह प्रशासनिक संवेदना की कहानी है। अब पटेरा की जनता पूछ रही है—जनपद पंचायत में अव्यवस्था का असली जिम्मेदार आखिर कौन है ?




