कलेक्टर बंगले ने पूरे किए 100 वर्ष, शताब्दी समारोह पर भव्य रोशनी एवं सजावट… शासन से प्रशासन तक एक सदी की विरासत, दमोह में 44 कलेक्टरों ने संभाली अब तक कमान

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रिपोर्ट – शानू शर्मा (ब्यूरो दमोह)
दमोह। जिले के प्रशासनिक और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक कलेक्टर बंगला, दमोह ने 1 जनवरी 2026 को अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर ऐतिहासिक भवन को विशेष रूप से आकर्षक और भव्य रोशनी से सजाया गया। शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा, जिससे यह ऐतिहासिक स्थल और भी गौरवपूर्ण पलो का गर्व बनेगा। दमोह कलेक्टर बंगले का निर्माण 1926 में हुआ था और तब से यह भवन जिले के प्रशासनिक इतिहास का साक्षी रहा है। यह न केवल प्रशासनिक कार्यों का केंद्र रहा है, बल्कि जिले की ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति का प्रतीक भी माना जाता है। कलेक्टर बंगला ने पिछले 100 वर्षों में जिले के प्रशासनिक ढांचे और विकास के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का साक्षी रहा है। इस दौरान यहाँ कुल 44 कलेक्टरों ने अपनी सेवाएँ दी हैं। वर्तमान में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर (11 मार्च 2024 – वर्तमान) इस ऐतिहासिक भवन में कार्यरत हैं। शताब्दी समारोह के अवसर पर भवन को भव्य रोशनी से सजाया गया।
दमोह कलेक्टर बंगले में सेवा देने वाले सभी कलेक्टर और उनके कार्यकाल:
• 1. एस.एन. राबरा (01 अक्टूबर 1956 – 14 सितंबर 1958)
• 2. ए.ए. पाटिल (19 सितंबर 1958 – 31 दिसंबर 1961)
• 3. डब्ल्यू.एस. तानबे (01 जनवरी 1962 – 05 अप्रैल 1963)
• 4. एच.एन. बनर्जी (06 अप्रैल 1963 – 13 जून 1966)
• 5. एन.पी. कोनहारे (14 जून 1966 – 10 जुलाई 1967)
• 6. ए.एस. दास (11 जुलाई 1967 – 24 अप्रैल 1968)
• 7. ओ.पी. मेहरा (10 मई 1968 – 16 दिसंबर 1969)
• 8. एस.ए. राणे (17 दिसंबर 1969 – 29 अगस्त 1971)
• 9. के.एस. भटनागर (30 अगस्त 1971 – 24 जून 1972)
• 10. एस.एन. साकल्ले (03 जुलाई 1972 – 06 जून 1973)
• 11. जे.पी.आई. सिंह (09 जून 1973 – 21 मार्च 1974)
• 12. के.श. ठाकुर (04 मई 1974 – 30 सितंबर 1977)
• 13. रणवीर सिंह (01 अक्टूबर 1977 – 03 जनवरी 1978)
• 14. के. शंकर नारायण (01 फरवरी 1978 – 06 जनवरी 1979)
• 15. टी. रहमान (08 जनवरी 1979 – 05 अगस्त 1980)
• 16. एस.पी. दुबे (06 अगस्त 1980 – 06 जुलाई 1983)
• 17. पदमवीर सिंह (08 जुलाई 1983 – 03 सितंबर 1984)
• 18. एन.के. वैद्य (04 सितंबर 1984 – 22 जनवरी 1985)
• 19. एस.एन. तिवारी (23 जनवरी 1985 – 17 जून 1985)
• 20. दिलीप मेहरा (18 जून 1985 – 06 जून 1986)
• 21. पी.डी. मीणा (09 जून 1986 – 30 जून 1988)
• 22. राकेश अग्रवाल (10 जुलाई 1988 – 08 जनवरी 1990)
• 23. राम सिंह ठोलिया (09 जनवरी 1990 – 17 अगस्त 1990)
• 24. राजकिशोर स्वाई (18 अगस्त 1990 – 27 अप्रैल 1993)
• 25. डी.के. भट्ट (28 अप्रैल 1993 – 06 अगस्त 1994)
• 26. राजेन्द्र प्रसाद मंडल (06 अगस्त 1994 – 17 मार्च 1998)
• 27. एस.एन. मिश्रा (17 मार्च 1998 – 19 जून 2000)
• 28. सी.के. खेतान (19 जून 2000 – 19 दिसंबर 2000)
• 29. अरुण तिवारी (29 दिसंबर 2000 – 07 जून 2002)
• 30. एस.के. वेद (07 जून 2002 – 15 जनवरी 2004)
• 31. संदीप सक्सेना (15 जनवरी 2004 – 11 सितंबर 2005)
• 32. राघवेन्द्र कुमार सिंह (12 सितंबर 2005 – 19 मार्च 2006)
• 33. पवन कुमार शर्मा (03 अप्रैल 2006 – 11 जून 2007)
• 34. आर.ए. खंडेलवाल (11 जून 2007 – 29 मई 2010)
• 35. एस.पी.एस. सलूजा (29 मई 2010 – 18 अप्रैल 2011)
• 36. शिवानंद दुबे (18 अप्रैल 2011 – 16 मार्च 2012)
• 37. स्वतंत्र कुमार सिंह (16 मार्च 2012 – 02 जून 2015)
• 38. श्रीनिवास शर्मा (03 अगस्त 2015 – 19 मई 2018)
• 39. जे. विजयकुमार (19 मई 2018 – 24 दिसंबर 2018)
• 40. नीरज कुमार सिंह (24 दिसंबर 2018 – 04 जून 2019)
• 41. तरुण राठी (04 जून 2019 – 08 मई 2021)
• 42. एस. कृष्णा चैतन्य (08 मई 2021 – 06 अप्रैल 2023)
• 43. मयंक अग्रवाल (06 अप्रैल 2023 – 10 मार्च 2024)
• 44. सुधीर कुमार कोचर (11 मार्च 2024 – वर्तमान)
वर्ष 1926 में निर्मित दमोह कलेक्टर बंगला अंग्रेजी शासन काल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। उस समय यह भवन कलेक्टर आवास नहीं था, बल्कि इसमें ब्रिटिश शासन के दौरान ब्रिगेडियर के पद पर पदस्थ वरिष्ठ अंग्रेज अधिकारी निवास करते थे। यह आवास उस दौर में शासन और प्रशासनिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। स्वतंत्र भारत में दमोह जिले के गठन के बाद, वर्ष 1956 में पहली बार इस ऐतिहासिक आवास में कलेक्टर का आधिकारिक निवास प्रारंभ हुआ। उस समय एस.एन. राबरा दमोह के पहले कलेक्टर के रूप में इस शासकीय आवास में रहने पहुंचे थे। तब से लेकर आज तक यह ऐतिहासिक कलेक्टर बंगला जिले के प्रशासनिक इतिहास का सजीव साक्षी बना हुआ है। बीते समय से अब तक कुल 44 कलेक्टरों ने इस शासकीय आवास में निवास करते हुए दमोह जिले के प्रशासन की जिम्मेदारी संभाली है। आज भी यह भवन न केवल एक प्रशासनिक आवास है, बल्कि दमोह जिले की ऐतिहासिक विरासत, गौरव और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

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