वंशीपुर पंचायत में सुनियोजित घोटाला, फर्जी मस्टर रोल से सरकारी धन की बंदरबांट… आय से अधिक संपत्ति की जांच की उठी जोरदार मांग

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रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/जबेरा। जनपद पंचायत जबेरा की ग्राम पंचायत वंशीपुर अब विकास का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और सत्ता-संरक्षण का गढ़ बनती जा रही है। मनरेगा सहित अन्य शासकीय योजनाओं के नाम पर जिस बेखौफ अंदाज में सरकारी धन की लूट की जा रही है, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि कागजों में काम पूरे दिखाए जा रहे हैं, खातों में भुगतान जमा है, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह शून्य नजर आ रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में खेत बाउंड्रीवाल (खकरी), सड़क, नाली सहित कई निर्माण कार्य या तो वर्षों पहले ही पूरे हो चुके थे या फिर कई स्थानों पर गुणवत्ताहीन और अधूरे कार्य कराए गए। इसके बावजूद फर्जी मस्टर रोल तैयार कर मजदूरों की झूठी हाजिरी भरते हुए लाखों रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। यह कोई एक बार की गड़बड़ी नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा सुनियोजित घोटाला बताया जा रहा है। जिसका सिलसिला लगातार जारी है।

सबसे चौंकाने वाला और गंभीर तथ्य यह है कि लगभग 9 से 10 चुनिंदा व्यक्तियों की फोटो का इस्तेमाल कर, 250 से अधिक फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगातार डिमांड में डाली जा रही है। यह खेल न तो आकस्मिक है और न ही तकनीकी गलती, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा फर्जीवाड़ा है। इतने बड़े स्तर पर फर्जी हाजिरी और भुगतान जनपद कार्यालय एवं जिला पंचायत स्तर की भूमिका के बिना संभव नहीं माने जा रहे हैं। यही वजह है कि अब जनपद से लेकर जिला पंचायत तक के अधिकारियों की भूमिका भी गंभीर संदेह के घेरे में आ गई है।

भ्रष्टाचार की परतें यहीं खत्म नहीं होतीं। सरपंच प्रतिनिधि डाल सिंह ठाकुर उर्फ डल्लू पर शासकीय एवं संभावित वन भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराने के साथ-साथ अपने मकान के पीछे तथा आसपास के क्षेत्र में अवैध उत्खनन कराए जाने के भी गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर मिट्टी/मुरम/ का अवैध उत्खनन किया गया, जिससे शासन को राजस्व हानि हुई और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा। यदि जांच में अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है, तो मामला केवल पंचायत स्तर के भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खनिज अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं अन्य सख्त कानूनों के तहत भी कार्रवाई योग्य होगा। इसके बावजूद संबंधित विभागों की खामोशी कई असहज सवाल खड़े कर रही है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आरोप है, कि जनपद और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी या तो जानबूझकर आंख मूंदे हुए हैं या फिर इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में मौन साझेदार बने हुए हैं। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो पंचायत में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी न होतीं।
एक ओर मजदूर काम के लिए दर-दर भटक रहे हैं, दूसरी ओर फर्जी हाजिरी के जरिए कागजों में रोजगार दिखाकर सरकारी राशि डकार ली जा रही है। यह सीधे-सीधे गरीबों के हक पर डाका और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ खुला धोखा है। अब मांग साफ की जा रही है, कि सिर्फ खानापूर्ति वाली जांच नहीं, बल्कि फर्जी मस्टर रोल, संदिग्ध भुगतान, फोटो आधारित फर्जी हाजिरी, अवैध निर्माण और आय से अधिक संपत्ति की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
वंशीपुर पंचायत का यह मामला अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जनपद और जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन चुका है। सवाल साफ और तीखा है, क्या प्रशासन इस भ्रष्टाचार के मकड़जाल को तोड़ने का साहस दिखाएगा, या फिर यह घोटाला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?

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