पटेरा थाने में नया नेतृत्व, नई चुनौती…क्या धर्मेंद्र गुर्जर रोक पाएंगे अवैध कारोबार का साम्राज्य ?

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दमोह/पटेरा। दमोह जिले का पटेरा थाना पिछले कई महीनों से विवादों, आरोपों और अवैध गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहा है। लगातार बढ़ते दबाव और स्थानीय आक्रोश के बीच पुलिस प्रशासन ने बड़ा निर्णय लेते हुए नए थाना प्रभारी के रूप में धर्मेंद्र गुर्जर की पदस्थापना की है। यह बदलाव पटेरा क्षेत्र की कानून-व्यवस्था सुधारने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व थाना प्रभारी सरोज सिंह ठाकुर के कार्यकाल के दौरान कई गंभीर आरोप उभरकर सामने आए। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि अवैध सट्टा और शराब कारोबार पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। कुंडलपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री के लिखित आदेश के बावजूद शराब विक्री, शिकारपुरा में दिनदहाड़े हत्या के बाद अगले दिन मृतक के भाई की संदिग्ध मौत, बमनपुरा में उग्र चक्काजाम और हालात इतने बिगड़े कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को स्वयं ग्रामीणों की शिकायतें स्थल पर जाकर सुनना पड़ीं तथा सतरिया पैर धुलाई कांड पर हाई कोर्ट का स्वतः संज्ञान इन सभी घटनाओं ने थाना प्रभारी की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया।
पूर्व थाना प्रभारी पर लगने वाले आरोपों की सूची यहीं खत्म नहीं हुई। सत्ताधारी दल और पत्रकार विवाद में पक्षपात के आरोप, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण न होने देने और पुलिस की भूमिका पर उठे सवालों ने पटेरा थाने के प्रति जनता का विश्वास डगमगा दिया। इसी बीच भगवती मानव कल्याण संगठन के एक कार्यकर्ता द्वारा वायरल की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग ने मामले को और गंभीर बना दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि अवैध शराब मामलों में पुलिस ने उदासीनता बरती। ऑडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेज हलचल हुई और शनिवार देर रात जारी आदेश में सरोज सिंह ठाकुर को लाइन अटैच कर दिया गया।
इन परिस्थितियों के बाद अब पटेरा की कमान धर्मेंद्र गुर्जर के हाथों में है। उनकी पदस्थापना के साथ ही स्थानीय स्तर पर नई उम्मीदों का माहौल बनने लगा है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से पटेरा अवैध व्यवसायों और आपराधिक गतिविधियों की गिरफ्त में रहा है, ऐसे में सख्त और निष्पक्ष नेतृत्व की अत्यंत जरूरत थी। धर्मेंद्र गुर्जर का पूर्व रिकॉर्ड इस उम्मीद को और मजबूत करता है। हिंडोरिया थाना प्रभारी रहते हुए उन्होंने अवैध जुआ फड़, गांजा तस्करी और अवैध हथियारों के कारोबार पर करारा प्रहार किया था। उनके कार्यकाल के दौरान अपराधियों में खौफ और आम जनता में विश्वास मजबूत हुआ। पुलिस अधीक्षक स्तर पर भी उनकी छवि एक मेहनती, सक्रिय और प्रभावकारी कार्यशैली वाले अधिकारी की रही है।
पटेरा थाना क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को देखते हुए नए थाना प्रभारी के सामने चुनौतियाँ कम नहीं हैं। अवैध गतिविधियों का गहराता नेटवर्क, अपराधियों का बढ़ता मनोबल और जनता का टूटा भरोसा ये सभी मुद्दे तत्काल और कठोर कदमों की मांग करते हैं। अब देखना यह होगा कि धर्मेंद्र गुर्जर इन चुनौतियों का सामना किस दृढ़ता और रणनीति के साथ करते हैं। फिलहाल, पटेरा क्षेत्र में एक नई शुरुआत की उम्मीद जागी है। स्थानीय नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि नया नेतृत्व क्षेत्र को अवैध धंधों और अपराध से मुक्त कर न्याय और सुरक्षा की भावना को पुनर्स्थापित करेगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि धर्मेंद्र गुर्जर जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।

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