रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/हटा। देश की रीढ़ कहे जाने वाले किसान आज अपनी ही खेती के लिए खाद जैसी बुनियादी जरूरत को तरस रहे हैं। हटा के डबल लॉक खाद वितरण केंद्र पर हालात इतने खराब हैं कि अन्नदाता कड़ी धूप और भीषण गर्मी में घंटों कतारों में खड़े रहने के बावजूद पर्याप्त खाद नहीं पा रहे। किसानों का कहना है कि उन्हें तीन-चार दिन से लाइन लगाने के बावजूद जरूरत भर की खाद नहीं मिल रही।
वितरण केंद्र की दुर्दशा – न छाया, न पानी, न बैठने की व्यवस्था
वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम यह है कि किसानों के लिए बुनियादी इंतजाम तक नहीं किए गए। धूप से बचने के लिए छाया का अभाव है, थकान मिटाने के लिए बैठने की सुविधा नहीं है और प्यास बुझाने तक का पानी तक नहीं मिलता।
घंटों लाइन, फिर भी अधूरी आपूर्ति
किसानों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि इतनी मशक्कत और इंतजार के बाद भी उन्हें उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही। कई किसान खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। एक किसान ने आक्रोश जताते हुए कहा, कि हमारा खाता 12 एकड़ का है, पर हमें सिर्फ 3 से 4 बोरी खाद ही दी जा रही है। चार-चार दिन से लाइन में लग रहे हैं, फिर भी जरूरत पूरी नहीं हो रही। सरकार को हमारी चिंता नहीं है।
फसल बर्बादी का डर, बढ़ा आक्रोश
किसानों ने चेतावनी दी है कि बुवाई का महत्वपूर्ण समय तेजी से निकल रहा है। समय पर खाद नहीं मिलने से फसल बर्बाद हो जाएगी और उनकी आर्थिक व मानसिक परेशानी और बढ़ जाएगी।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
यह स्थिति सवाल खड़े करती है कि क्या प्रशासन वास्तव में किसानों की चिंता करता है? बिजली, पानी और कर्ज की मार झेल रहे अन्नदाता अब खाद के लिए भी दर-दर भटक रहे हैं। यदि समय रहते आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो यह संकट बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है। स्थानीय प्रशासन और सरकार को चाहिए कि वे इस मामले का संज्ञान लें, तत्काल प्रभाव से खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें और वितरण केंद्रों पर किसानों के लिए मानवीय और उचित व्यवस्था लागू करें।




