रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह। सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आम आदमी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है और दूसरी ओर सरकारी रिकॉर्ड में ऐसी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। कहीं जीवित महिला को समग्र आईडी में मृत घोषित कर दिया गया, तो कहीं बिना बिजली कनेक्शन के ही उपभोक्ता के नाम 14 हजार रुपये का बिल जारी हो गया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में ऐसे मामले सामने आए, जिन्होंने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कुल 274 आवेदनों पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच, सुधार और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जनसुनवाई में पहले 244 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि बाद में पहुंचे 30 आवेदनों को मिलाकर कुल 274 शिकायतों और समस्याओं पर सुनवाई की गई। कलेक्टर ने एक-एक आवेदक की समस्या सुनी और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही निराकरण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान 172 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा 24 आधार कार्डों का अपडेशन भी किया गया।
जीवित महिला को सरकारी रिकॉर्ड में बना दिया मृत, मामले में नोटिस जारी!
जनसुनवाई में खमरिया कलां निवासी प्रेम रानी पति ठाकुर सिंह की शिकायत ने समग्र आईडी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का मामला उजागर किया। महिला ने बताया कि उसे समग्र आईडी में मृत घोषित कर दिया गया है, जिसके कारण शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया। सवाल यह है कि बिना समुचित सत्यापन के किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत कैसे घोषित कर दिया गया और इस गलती का खामियाजा संबंधित महिला को क्यों भुगतना पड़ रहा है? कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीईओ जिला पंचायत एवं ई-गवर्नेंस मैनेजर को दस्तावेजों का परीक्षण कर समग्र आईडी में तत्काल आवश्यक सुधार कराने के निर्देश दिए। साथ ही इस त्रुटि के लिए जिम्मेदार संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है, ताकि नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
बिजली कनेक्शन नहीं, फिर भी 14 हजार का बिल! विभाग की जांच में सामने आई दूसरी कड़ी
बिलथरा, पोस्ट बांदकपुर निवासी लखन यादव ने ऐसी शिकायत की, जिसने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि उन्होंने न तो बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया और न ही आधार कार्ड अथवा समग्र ई-केवाईसी दी, इसके बावजूद उनके नाम 14 हजार रुपये का बिजली बिल जारी कर दिया गया। जब उपभोक्ता ने कनेक्शन ही नहीं लिया तो उसके नाम बिल कैसे जारी हुआ? आखिर आवेदन और कनेक्शन की प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई ? शिकायत पर कलेक्टर ने विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि संबंधित मकान में पहले से उनके पिता के नाम पर बिजली कनेक्शन संचालित है तथा नए आवेदन के आधार पर अलग बिल जारी हुआ है। कलेक्टर ने विभाग को आवश्यक कार्रवाई कर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए।
स्वामित्व योजना में त्रुटियों के कारण अटकी रजिस्ट्री, अब एसडीएम करेंगे सुनवाई
स्वामित्व योजना के अंतर्गत निशुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया में भी कई हितग्राहियों के आवेदन त्रुटियों और विसंगतियों के कारण लंबित पड़े हैं। ऐसे हितग्राहियों को राहत देते हुए कलेक्टर ने संबंधित एसडीएम के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा एसडीएम को धारा 115 के तहत अधिकार दिए गए हैं। अधिकारी दस्तावेजों का परीक्षण कर विधिवत सुनवाई के बाद नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। इससे हितग्राहियों को छोटी-छोटी त्रुटियों के लिए जिला मुख्यालय के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
सवाल जवाबदेही का भी…
जनसुनवाई में 274 आवेदन पहुंचना बताता है कि आम नागरिकों की समस्याएं कितनी व्यापक हैं। समग्र आईडी में जीवित महिला को मृत घोषित करना और बिना कनेक्शन के बिजली बिल जारी होने जैसे मामले केवल तकनीकी त्रुटियां मानकर नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। ऐसी गलतियों से आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ता है और आर्थिक व मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ती है। अब देखना होगा कि नोटिस, जांच और निराकरण के निर्देशों के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।



