पत्राचार का खेल या कार्रवाई से बचने की कोशिश? पटेरा जनपद में एमडीएम अनुबंध की जांच पर उठे सवाल पटेरा जनपद सीईओ हालधार मिश्रा की भूमिका पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, जिला पंचायत को बार-बार पत्राचार के बावजूद कार्रवाई स्पष्ट नहीं; ₹50 हजार मांगने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग।

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रिपोर्टर (अमित शर्मा 8349348053)
दमोह/पटेरा। मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) से संबंधित स्व-सहायता समूह के अनुबंध का मामला अब पत्राचार और जांच प्रक्रिया को लेकर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ता दिलीप कुमार पाठक ने जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हालधार मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत और जिला पंचायत के बीच लगातार पत्राचार हो रहा है, लेकिन ठोस कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अनुबंध पर सीईओ के हस्ताक्षर होने और प्रस्ताव पत्र क्रमांक 1495/एमडीएम/2026-27 के माध्यम से दस्तावेज जिला पंचायत दमोह भेजे जाने के बावजूद दोबारा परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित दस्तावेज पहले ही जिला पंचायत भेजे जा चुके थे, तो दोबारा परीक्षण की जरूरत क्यों पड़ी?
मिलीभगत के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
दिलीप कुमार पाठक ने आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हालधार मिश्रा की कथित मिलीभगत से पत्राचार के जरिए मामले को उलझाया जा रहा है। उनका कहना है कि जनपद पंचायत से जिला पंचायत और जिला पंचायत से दोबारा जनपद पंचायत तक पत्र भेजे जाने की प्रक्रिया के बीच वास्तविक कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है।
हालांकि, मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
₹50 हजार मांगने के आरोप भी जांच के दायरे में
शिकायतकर्ता ने ₹50 हजार मांगने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि व्हाट्सएप के माध्यम से कार्रवाई से संबंधित जानकारी मिलने के बाद उन्हें जिला पंचायत दमोह में ₹50 हजार लेकर आने को कहा गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रुपये नहीं देने के बाद मामले में दोबारा परीक्षण के लिए पत्र जारी किया गया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित संदेशों, नोटशीट और पत्राचार की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत बंद, कार्रवाई पर सवाल बरकरार
शिकायतकर्ता ने सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 39269106 को बंद किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिकायत का संतोषजनक निराकरण किए बिना ही उसे बंद कर दिया गया।
उन्होंने दमोह कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की जांच ऐसे वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए, जिसका प्रकरण से सीधा संबंध न हो। जांच में अनुबंध, प्रस्ताव पत्र, जांच प्रतिवेदन, विभागीय पत्राचार और शिकायत बंद करने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनपद पंचायत और जिला पंचायत के बीच हो रहे पत्राचार के बाद कोई ठोस निर्णय लिया गया है? तो उसका विवरण सामने आना चाहिए
फिलहाल, मामले में जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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