रिपोर्टर अमित शर्मा (8349348053)
दमोह। जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कथित अवैध वसूली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कुछ बंगाली डॉक्टरों का दावा है कि पत्रकारिता की आड़ में लोगों का एक समूह उनके क्लीनिकों पर पहुंचकर पूछताछ करता है और कथित तौर पर पैसों की मांग करता है। डॉक्टरों के अनुसार, पैसे नहीं देने पर पुलिस में शिकायत करने और कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन यदि शिकायतें सही हैं तो मामला गंभीर जांच की मांग करता है।
🔥 8 से 10 लोगों की टीम, कार से पहुंचने का दावा!
डॉक्टरों के मुताबिक, यह सिलसिला पिछले 2 से 3 वर्षों से चल रहा है। उनका आरोप है कि संबंधित लोग अकेले नहीं आते, बल्कि 8 से 10 सदस्यों के समूह के साथ कार से क्लीनिकों पर पहुंचते हैं। वहां डॉक्टरों से तरह-तरह के सवाल किए जाते हैं और कथित रूप से पैसों की मांग की जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितता की जांच करने पहुंच रहा है, तो उसके पास क्या अधिकार है? क्या वह किसी अधिकृत विभाग का प्रतिनिधि है या केवल पत्रकार होने का दावा करके दबाव बना रहा है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
⚡ कोरोना काल की सेवा का हवाला, अब कथित दबाव से परेशान होने का दावा
कुछ बंगाली डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना महामारी के कठिन दौर में उन्होंने बुखार, सर्दी और अन्य सामान्य बीमारियों से परेशान लोगों को दवाइयां देकर मदद करने का प्रयास किया था। उनका आरोप है कि आज उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है और कथित तौर पर पैसे नहीं देने पर शिकायत की धमकी दी जाती है।
हालांकि, कोरोना काल में लोगों की मदद करने का दावा अपने आप में चिकित्सा की वैधता का प्रमाण नहीं है। यदि कोई डॉक्टर आवश्यक योग्यता या अनुमति के बिना इलाज कर रहा है, तो स्वास्थ्य विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन जांच के नाम पर कथित अवैध वसूली या धमकी को भी किसी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
🚨 बंगाली डॉक्टर ही क्यों? दूसरे क्लीनिकों की जांच कौन करेगा?
दमोह जिले में कई स्थानों पर क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि कार्रवाई या पूछताछ के लिए बार-बार उन्हीं को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
पत्रकारिता की आड़ में दबाव या नियमों के तहत जांच?
पत्रकारिता का उद्देश्य जनता के सामने सच्चाई लाना और व्यवस्था की कमियों को उजागर करना है। लेकिन पत्रकार होने का दावा किसी को धमकी देने, अवैध वसूली करने या पुलिस अधिकारी की तरह अधिकार जताने की अनुमति नहीं देता।
प्रशासन से सीधे सवाल
दमोह जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग को इन आरोपों का संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए। यदि डॉक्टरों से अवैध रूप से पैसे मांगे जा रहे हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हो। वहीं, यदि किसी क्लीनिक में बिना आवश्यक योग्यता या अनुमति के चिकित्सा की जा रही है, तो वहां भी कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर सच क्या है?
क्या दमोह जिले में चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के नाम पर कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा है, या फिर इन शिकायतों के पीछे कोई दूसरा पक्ष भी है?
पिछले 2–3 वर्षों से कथित गतिविधियां जारी रहने के डॉक्टरों के दावे के बीच अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों की जांच करे और स्थिति स्पष्ट करे। जब तक जांच पूरी नहीं होती, न डॉक्टरों के आरोपों को अंतिम सच माना जा सकता है और न ही संबंधित लोगों को दोषी ठहराया जा सकता है।

