रिपोर्ट—शरद गर्ग, दमोह
दमोह/पटेरा। प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत संचालित मध्यान्ह भोजन (MDM) व्यवस्था पटेरा ब्लॉक के ग्राम देवडोंगरा में सवालों के घेरे में है। मामला अनुबंध की वैधता, नवीनीकरण, जांच प्रतिवेदन, CM हेल्पलाइन के निराकरण और MDM कार्य आवंटन तक पहुंच गया है। उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता के आरोपों ने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत पटेरा के प्रभारी खंड पंचायत अधिकारी अंगद सिंह पर आरोप लगाया है कि विरोधाभासी तथ्यों के बावजूद ऐसा प्रतिवेदन तैयार किया गया, जिसके आधार पर CM हेल्पलाइन की शिकायत का निराकरण कर दिया गया। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
RTI से मिली जानकारी ने खड़े किए बड़े सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी में ज्योति स्व-सहायता समूह का वर्ष 2017 का अनुबंध सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 2017 के बाद 27 जुलाई 2026 तक अनुबंध नवीनीकरण का कोई दस्तावेज सामने नहीं आया। यहीं से मामले का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—यदि अनुबंध का नवीनीकरण नहीं हुआ था, तो CM हेल्पलाइन के निराकरण में उसे वैध मानने का आधार क्या था? यदि वर्ष 2017 के बाद नवीनीकरण हुआ था तो उसका आदेश और दस्तावेज कहां हैं? और यदि नवीनीकरण नहीं हुआ, तो फिर अनुबंध की वैधता किस आधार पर मानी गई? इन सवालों का जवाब मूल रिकॉर्ड के सत्यापन से ही सामने आएगा।
RTI में सवाल, CM हेल्पलाइन में ‘वैध’—विरोधाभास क्यों?
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि उपलब्ध जानकारी में अनुबंध के नवीनीकरण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, जबकि शिकायत के निराकरण में उसी अनुबंध को वैध बताया गया। इस विरोधाभास ने शिकायत निवारण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह जांच का विषय है कि निराकरण तैयार करने वाले अधिकारी के सामने कौन-कौन से दस्तावेज थे और अनुबंध की वैधता तय करने के लिए किस रिकॉर्ड को आधार बनाया गया।
बिना सहमति शिकायत बंद करने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसकी संतुष्टि अथवा सहमति के बिना CM हेल्पलाइन शिकायत का निराकरण कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा आपत्ति और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बावजूद यदि शिकायत बंद की गई, तो उसके आधार की भी जांच की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत की पूरी हिस्ट्री, प्रस्तुत दस्तावेज, अधिकारी का प्रतिवेदन और अंतिम निराकरण रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।
‘फर्जी प्रतिवेदन’ के आरोप, अब निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने संबंधित प्रतिवेदन को ‘फर्जी’ और तथ्यविरोधी बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि यह आरोप अभी जांच के अधीन हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी अधिकारी ने जानबूझकर गलत तथ्य दर्ज किए या महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नजरअंदाज किया, तो मामला गंभीर प्रशासनिक अनियमितता का बन सकता है। इसलिए अब केवल शिकायत को दोबारा बंद करना नहीं, बल्कि मूल दस्तावेजों की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी माना जा रहा है।
दूसरे समूह के वैध अनुबंध पर भी उठे सवाल
मामले में मां चंडी स्व-सहायता समूह के पास संबंधित कार्य के लिए वैध अनुबंध होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद समूह को MDM का कार्य नहीं मिलने पर कार्य आवंटन की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। यदि एक समूह के अनुबंध की वैधता पर सवाल है और दूसरे समूह के पास वैध अनुबंध होने का दावा है, तो MDM का कार्य किस आदेश, नियम और प्रक्रिया के तहत आवंटित किया गया? यह सवाल भी जांच में शामिल होना चाहिए।
MDM व्यवस्था पर उठीं उंगलियां
प्रधानमंत्री पोषण योजना सीधे स्कूली बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी है। ऐसे में समूह चयन, अनुबंध नवीनीकरण और MDM कार्य आवंटन में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। देवडोंगरा का मामला अब सिर्फ दो समूहों के बीच कार्य आवंटन का विवाद नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड, अनुबंध की वैधता और शिकायत निवारण प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल बन गया है।
अब दस्तावेजों का आमने-सामने मिलान जरूरी
मामले में ज्योति समूह का मूल अनुबंध, वर्ष 2017 का अनुबंध, उसके बाद के संभावित नवीनीकरण आदेश, जनपद पंचायत के रिकॉर्ड, RTI से प्राप्त जानकारी, संबंधित प्रतिवेदन और CM हेल्पलाइन की पूरी प्रक्रिया का आमने-सामने मिलान किया जाना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी ने क्या रिपोर्ट दी, रिपोर्ट किस दस्तावेज के आधार पर तैयार हुई और शिकायत को किस आधार पर निराकृत किया गया।
मामले में उठे गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की उठी जोरदार मांग
फिलहाल अनुबंध की वैधता, MDM कार्य आवंटन, जांच प्रतिवेदन और CM हेल्पलाइन निराकरण—चारों बिंदुओं पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला जांच के बाद ही हो सकता है। लेकिन सवाल गंभीर हैं—RTI से प्राप्त जानकारी में नवीनीकरण पर सवाल, CM हेल्पलाइन में अनुबंध को वैध बताने का आधार, शिकायतकर्ता की सहमति के बिना निराकरण का आरोप और दूसरे समूह के वैध अनुबंध के बावजूद कार्य आवंटन पर सवाल—इन सभी कड़ियों की निष्पक्ष जांच कब होगी? अब जरूरत शिकायत दबाने की नहीं, रिकॉर्ड खोलने की है। क्योंकि उठती उंगलियां किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी शिकायत निवारण और MDM कार्य आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही हैं।



