रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/हटा। स्वास्थ्य व्यवस्था के तमाम दावों के बीच हटा ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हिनौता से सामने आया घटनाक्रम सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की रात की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रसव पीड़ा से कराहती महिला अस्पताल पहुंची, लेकिन आरोप है कि उसे समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली और आखिरकार स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। मामला रविवार रात का है। कमता गांव निवासी 23 वर्षीय गायत्री कुशवाहा को प्रसव पीड़ा होने पर उनके पति कल्लू कुशवाहा एंबुलेंस से हिनौता स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। पति का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर मुख्य गेट बंद मिला और अंदर केवल एक कर्मचारी सो गया था, काफी प्रयास के बाद गेट खोला गया तथा अंदर डॉक्टर या नर्स भी मौजूद नहीं थी।
प्रसव पीड़ा में महिला गेट पर बैठी रही, मदद का इंतजार!
पति के मुताबिक, उन्होंने तत्काल हटा बीएमओ को फोन कर स्थिति बताई। उनका आरोप है कि नर्स और अन्य स्टाफ के पहुंचने में काफी समय लगा और तब तक महिला की हालत बिगड़ती गई। देखते ही देखते अस्पताल के गेट पर ही महिला का प्रसव हो गया। यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है—रात में प्रसव जैसी आपात स्थिति के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर जिम्मेदार स्टाफ की उपलब्धता क्यों नहीं थी? यदि स्टाफ मौजूद था तो महिला को गेट पर ही प्रसव कराने की नौबत कैसे आई? और यदि नर्स कुछ ही मिनट में पहुंच गई थी, तो फिर परिजनों के आरोपों और अस्पताल की वास्तविक व्यवस्था में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
पति ने लगाया लापरवाही का आरोप, कार्रवाई की मांग
कल्लू कुशवाहा ने स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची महिला को समय पर उपचार मिलना चाहिए था, लेकिन व्यवस्था की कमी के कारण उसे अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।
बीएमओ बोले—आरोप बेबुनियाद, नर्स खाना खाने गई थी
वहीं हटा बीएमओ डॉ. उमाशंकर पटेल ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में दो गेट हैं। रात में एक गेट बंद रहता है, जबकि दूसरा गेट हमेशा खुला रहता है। जिस समय महिला अस्पताल पहुंची, उस समय स्टाफ नर्स खाना खाने के लिए पास स्थित क्वार्टर गई थी। बीएमओ के अनुसार, पति का फोन आते ही नर्स तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंची और 10 मिनट के भीतर महिला के पास पहुंच गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल के गेट पर ताला नहीं लगा रहता।
जच्चा-बच्चा स्वस्थ, मगर व्यवस्था पर सवालों की डिलीवरी कौन करेगा?
जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और उनका उपचार स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। यह राहत की बात है, लेकिन सिर्फ जच्चा-बच्चा के स्वस्थ होने से उस रात की व्यवस्था पर उठे सवाल खत्म नहीं हो जाते। एक तरफ पति अस्पताल का गेट बंद होने और स्टाफ के नदारद होने का आरोप लगा रहा है, दूसरी तरफ बीएमओ का दावा है कि गेट खुला था और नर्स महज 10 मिनट में पहुंच गई। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उस रात हिनौता स्वास्थ्य केंद्र में वास्तव में क्या हुआ ? क्या प्रसव जैसी आपात स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र पर 24 घंटे पर्याप्त स्टाफ की मौजूदगी थी? क्या ड्यूटी व्यवस्था की निगरानी हुई थी? और यदि सब कुछ व्यवस्था के मुताबिक था तो महिला को अस्पताल के गेट पर ही प्रसव कराने की नौबत आखिर क्यों आई ? मामला जांच का है—और जांच ही तय करेगी कि गलती व्यवस्था की थी, ड्यूटी में लापरवाही की या फिर आरोपों में सच्चाई नहीं थी।



