दमोह/जबेरा। सत्ता के गलियारों में विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दमोह जिले की जबेरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कटंगी में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां सरकारी निर्माण कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की राशि निकलने के बावजूद सड़क अधूरी पड़ी होने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने भाजपा मंडल अध्यक्ष सत्यपाल सिंह लोधी पर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए सीधे जिला प्रशासन से जवाब मांगा है।
12 लाख से ज्यादा की निकासी, फिर भी सड़क अधूरी! आखिर पैसा गया कहां?
ग्राम पंचायत कटंगी में डीपी से पथरगढ़ा तलैया की ओर बनने वाली सुदूर संपर्क सड़क के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 20 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार 6 जून 2025 से संबंधित निर्माण कार्य प्रस्तावित था, लेकिन आरोप है कि 12 लाख 400 रुपये से अधिक की राशि निकाले जाने के बावजूद सड़क आज तक अधूरी पड़ी है।
अब सवाल सीधा है—जब लाखों रुपये सरकारी खाते से निकल चुके हैं, तो सड़क का निर्माण पूरा क्यों नहीं हुआ? क्या निर्माण कार्य केवल कागजों में पूरा दिखाया गया या फिर भुगतान के अनुपात में धरातल पर काम ही नहीं हुआ? इस पूरे मामले की भुगतान और मूल्यांकन रिकॉर्ड के आधार पर जांच जरूरी है।
मंत्री के करीबी होने का प्रभाव या अधिकारियों की चुप्पी?
ग्रामीणों का आरोप है कि मंडल अध्यक्ष सत्यपाल सिंह लोधी को मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक धर्मेंद्र सिंह लोधी का करीबी माना जाता है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई प्रभावी क्यों नहीं दिखाई देती? क्या राजनीतिक रसूख के चलते जांच की रफ्तार धीमी पड़ रही है? हालांकि इन आरोपों और कथित संरक्षण के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर! शिकायतें बंद, समस्याएं बरकरार
ग्रामीणों का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल रहा। आरोप है कि शिकायतों को फोर्स क्लोज कर दिया जाता है, जबकि निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आखिर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने वाले ग्रामीणों को न्याय कब मिलेगा? क्या शिकायत बंद कर देने से अधूरी सड़क पूरी हो जाएगी और सरकारी राशि के इस्तेमाल का हिसाब मिल जाएगा?
कटंगी ही नहीं, परसई सहित अन्य पंचायतें भी जांच के दायरे में!
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कटंगी के अलावा परसई सहित अन्य ग्राम पंचायतों में भी निर्माण कार्यों और सरकारी राशि के आवंटन की जांच होनी चाहिए। किस पंचायत में कितनी राशि स्वीकृत हुई, किसके नाम पर भुगतान हुआ, कितना निर्माण हुआ और कितना काम अधूरा है—इन सभी बिंदुओं का खुलासा होना चाहिए।
इंजीनियरों के मूल्यांकन पर भी सवाल, क्या कागजों में हो रहा विकास?
ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ कार्यों का मूल्यांकन वास्तविक निर्माण की स्थिति से मेल खाता है या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। संबंधित इंजीनियरों, उपयंत्रियों और अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल जरूरी है। यदि निर्माण अधूरा है तो भुगतान और मूल्यांकन किस आधार पर किया गया, इसका जवाब सामने आना चाहिए।
मंडल अध्यक्ष की संपत्ति की जांच की मांग, कहां से आई इतनी संपत्ति?
ग्रामीणों ने भाजपा मंडल अध्यक्ष सत्यपाल सिंह लोधी की संपत्ति और आय के ज्ञात स्रोतों की भी जांच कराने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि विभिन्न पंचायतों में कराए गए निर्माण कार्यों और उनसे जुड़े भुगतान का पूरा ब्यौरा सामने आना चाहिए। साथ ही मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के माध्यम से किन पंचायतों में किन विकास कार्यों के लिए कितनी राशि स्वीकृत या आवंटित की गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
प्रशासन से दो टूक सवाल—जांच होगी या फिर शिकायत भी फोर्स क्लोज?
ग्रामीणों ने कलेक्टर दमोह और जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि कटंगी सहित अन्य पंचायतों के निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जिला स्तरीय टीम से जांच कराई जाए। माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड, मूल्यांकन और निर्माण की गुणवत्ता का भौतिक सत्यापन हो। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास के नाम पर स्वीकृत लाखों रुपये का हिसाब कौन देगा? सड़क अधूरी है तो भुगतान किस आधार पर हुआ? शिकायतें बंद हो रही हैं तो जांच कौन करेगा? और यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है?
कटंगी के ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही चाहते हैं। सत्ता, संगठन और सरकारी तंत्र से जुड़े किसी भी व्यक्ति को जांच से ऊपर नहीं होना चाहिए।



