24 लाख की सीसी रोड पर भ्रष्टाचार की परतें! कटंगी पंचायत में निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, जिम्मेदारों की भूमिका भी संदेह के घेरे में सरपंच के नाम पर पंचायत संचालन के आरोप, मंडल अध्यक्ष सत्यपाल सिंह लोधी के घर पंचायत की सील और पासबुक रखने की चर्चा; उपयंत्री के रोक लगाने के दावे के बावजूद निर्माण जारी होने से उठे सवाल

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रिपोर्टर अमित शर्मा (8349348053)
दमोह/जबेरा। जनपद पंचायत जबेरा की ग्राम पंचायत कटंगी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। करीब 24 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही सीसी रोड एक बार फिर विवादों में है। खबर मध्यप्रदेश न्यूज द्वारा पूर्व में इस निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद सरपंच-सचिव द्वारा निर्माण कार्य शुरू तो करा दिया गया, लेकिन मौके पर दिखाई दे रही निर्माण सामग्री और कार्यप्रणाली ने गुणवत्ता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सीसी रोड निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। निर्माण में घटिया रेत का इस्तेमाल, सीमेंट की कथित कम मात्रा और गुणवत्ता से समझौते की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों की आशंका है कि यदि इसी तरह निर्माण जारी रहा तो सड़क एक साल भी टिक नहीं पाएगी और कुछ ही समय में उखड़ने लगेगी। सवाल यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को मजबूत सड़क के बजाय घटिया निर्माण क्यों दिया जा रहा है?
‘सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का!’ पंचायत में किसका चल रहा राज?
कटंगी पंचायत में सबसे गंभीर चर्चा पंचायत के वास्तविक संचालन को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्वाचित सरपंच की भूमिका केवल नाम तक सीमित रह गई है और पंचायत के कामकाज में भाजपा मंडल अध्यक्ष सत्यपाल सिंह लोधी का हस्तक्षेप बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत की सील, पासबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मंडल अध्यक्ष के घर पर रखे होने की बात सामने आई है।
कुछ ग्रामीणों ने सरपंच और मंडल अध्यक्ष सत्यपाल सिंह लोधी के बीच कथित समझौते की भी चर्चा की है। आरोप है कि सरपंच बनाने और पंचायत संचालन को लेकर दोनों के बीच शर्तें तय हुई थीं, जिनमें सरपंच की चार बेटियों के विवाह की जिम्मेदारी उठाने की बात भी शामिल बताई जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से दो बेटियों के विवाह कराए जा चुके हैं। हालांकि इन आरोपों और कथित समझौते की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
यदि पंचायत की सील, पासबुक और सरकारी दस्तावेज वास्तव में किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति के पास रखे हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी प्रशासनिक जांच होना जरूरी है। आखिर पंचायत का संचालन नियमों से हो रहा है या किसी कथित निजी समझौते के आधार पर?
उपयंत्री पावस सोनकर की भूमिका पर भी सवाल
निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर जब उपयंत्री पावस सोनकर से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने मौके पर आने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार एक-दो घंटे इंतजार के बाद भी वे निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचे।
इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इस सीसी रोड का निरीक्षण किया है, तो उन्होंने बताया कि वे निरीक्षण कर चुके हैं और महानदी की रेत इस्तेमाल करने के निर्देश दिए थे। साथ ही काम रुकवाने की बात भी कही।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
यदि उपयंत्री ने निर्माण कार्य रुकवाने और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार सामग्री लगाने के निर्देश दिए थे, तो इसके बावजूद मौके पर निर्माण कार्य कैसे जारी रहा? क्या उपयंत्री के निर्देशों को दरकिनार किया जा रहा है या फिर निरीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित है?
लाखों की सड़क या भ्रष्टाचार का नया नमूना?
कटंगी पंचायत में उठ रहे सवाल केवल एक सीसी रोड तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीण लगातार पंचायत के कार्यों में कथित अनियमितताओं की शिकायत करने की बात कह रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से उनकी नाराजगी बढ़ रही है।
फिलहाल कटंगी की 24 लाख की सीसी रोड पर उठे सवालों का जवाब जनता को चाहिए। सरकारी धन जनता की गाढ़ी कमाई है, किसी की निजी जागीर नहीं। यदि निर्माण में गड़बड़ी हुई है तो केवल औपचारिक निरीक्षण से काम नहीं चलेगा। मौके पर तकनीकी जांच, सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण, भुगतान और माप पुस्तिका की जांच तथा पंचायत के दस्तावेजों की पड़ताल जरूरी है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर निष्पक्ष जांच कराता है या कटंगी पंचायत में उठती आवाजें भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएंगी?

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