मूसलाधार बारिश ने खोली बदहाल व्यवस्थाओ की पोल: सड़कें बनीं तालाब, जिला अस्पताल की छत टपकी, पटेरा आईटीआई मार्ग कीचड़ में तब्दील! जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

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रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर दमोह जिले की व्यवस्थाओं की असली तस्वीर सामने ला दी। बारिश का पानी सड़कों पर जमा होते ही कई मार्ग तालाब में तब्दील नजर आए। दमोह शहर से लेकर पटेरा तक जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं और आवागमन प्रभावित रहा। सवाल उठ रहा है कि बारिश आते ही यदि सड़कें डूब जाएं तो आखिर बारिश पूर्व तैयारियों के नाम पर किया क्या गया ? मूसलाधार बारिश ने जिला अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए। अस्पताल की छत से पानी टपकने के कारण कुछ वार्डों और अन्य हिस्सों में पानी भर गया। मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ी, जबकि सफाईकर्मी पानी निकालने में जुटे रहे। जिस अस्पताल में मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, वहां बारिश का पानी छत से होकर वार्डों तक पहुंच जाए तो यह महज बारिश की समस्या नहीं, व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का सवाल बन जाता है। सवाल यह है कि बारिश से पहले छत और जलनिकासी व्यवस्था का निरीक्षण आखिर किस स्तर पर किया गया?
पटेरा में सड़कें बनीं तालाब, वीडियो वायरल
पटेरा में भी बारिश ने सड़कों की बदहाली उजागर कर दी। कई सड़कें पानी से लबालब हो गईं और लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ी। जलभराव से जुड़े वीडियो के सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे है। बारिश ने पानी जरूर बरसाया, लेकिन उससे ज्यादा जिम्मेदारों की तैयारियों के दावों की पोल खुल गई।
जलनिकासी के दावों की खुली पोल
हर साल बारिश आती है, हर साल जलभराव होता है और हर साल स्थायी समाधान के दावे सुनाई देते हैं। लेकिन जमीन पर तस्वीर बदलती नजर नहीं आती। बारिश शुरू होते ही सड़कें जलमग्न होना सीधे तौर पर सवाल खड़ा करता है कि क्या जलनिकासी व्यवस्था सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित है?
आई.टी.आई. मार्ग बदहाल, शिकायतों के बावजूद नहीं सुधरी तस्वीर
पटेरा स्थित शासकीय आई.टी.आई. जाने वाला करीब 100 से 150 मीटर मार्ग लंबे समय से बदहाल बताया जा रहा है। मार्ग की स्थिति को लेकर लगातार शिकायतें और आवेदन दिए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने की बात सामने आ रही है। बारिश के दौरान हालात और बिगड़ जाते हैं। कीचड़ और जलभराव के बीच ट्रेनिंग ऑफिसर और प्रशिक्षणार्थियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। जिस मार्ग से प्रशिक्षणार्थियों को रोजाना गुजरना पड़ता है, उसकी यह हालत जिम्मेदार व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है। जब लगातार शिकायतें और आवेदन जिम्मेदारों तक पहुंच रहे हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं? समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा? क्या किसी हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की आंख खुलेगी?
अब सवाल सिर्फ बारिश का नहीं, जवाबदेही का है
एक तरफ दमोह और पटेरा की सड़कें बारिश में तालाब बन रही हैं, दूसरी तरफ जिला अस्पताल की छत टपक रही है और आई.टी.आई. पहुंचने वाला मार्ग बदहाली का शिकार है। बारिश प्राकृतिक है, लेकिन हर बारिश में व्यवस्था का चरमराना प्राकृतिक नहीं हो सकता। यह सीधे तौर पर तैयारी, निगरानी और जवाबदेही का सवाल है। अब जनता को आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए। सवाल यह भी है कि हर साल बारिश जिम्मेदारों की तैयारियों की पोल खोलती रहेगी या इस बार कोई जिम्मेदारी भी तय होगी? बारिश थम जाएगी, पानी उतर जाएगा, लेकिन व्यवस्था की यह बदहाली कब उतरेगी—यह सवाल अब जिम्मेदारों के सामने है।

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