खबर का असर : ‘वैध’ अनुबंध की खुली पोल? नवीनीकरण गायब, कमीशनखोरी का शोर! CM हेल्पलाइन में ‘वैध’, जनपद पंचायत ने बताया नवीनीकरण नहीं

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सीएम हेल्पलाइन L- 3 से स्पेशल क्लोज मामला जनसुनवाई पहुंचा, शिकायत रिओपन और वैध समूह मैपिंग की मांग, जनपद से लेकर Mdm तक उठे गंभीर सवाल !
रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/पटेरा।  पटेरा ब्लॉक के ग्राम देवडोंगरा में प्रधानमंत्री पोषण योजना के MDM कार्य और ज्योति स्व-सहायता समूह के अनुबंध को लेकर विवाद अब गंभीर प्रशासनिक सवालों में बदल गया है। एक ओर CM हेल्पलाइन में अनुबंध को ‘वैध’ बताए जाने की बात सामने आई, वहीं खबर के बाद पटेरा जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी ने जिला पंचायत दमोह को भेजे गए पत्र में समूह के दस्तावेजों में निर्धारित नवीनीकरण नहीं पाए जाने का उल्लेख सामने आया है। मामले में जनपद पंचायत के पत्र क्रमांक 1452/एमडीएम/2026-27 में जिला पंचायत के 06 मई 2025 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा गया है कि PM पोषण का अनुबंध प्रत्येक दो वर्ष में नवीनीकरण किया जाना है, लेकिन प्रस्तुत दस्तावेजों में निर्धारित नवीनीकरण होना नहीं पाया गया।
नवीनीकरण नहीं मिला, फिर CM हेल्पलाइन में ‘वैध’ कैसे?
यही विरोधाभास अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। यदि अनुबंध के नवीनीकरण का रिकॉर्ड जांच में नहीं मिला, तो CM हेल्पलाइन में उसे वैध मानने का आधार क्या था? यदि नवीनीकरण हुआ था तो संबंधित आदेश और दस्तावेज सामने क्यों नहीं हैं? और यदि नवीनीकरण नहीं हुआ था तो वैधता किस रिकॉर्ड के आधार पर तय की गई?
L-3 से ‘स्पेशल क्लोज’, अब जनसुनवाई में रिओपन की मांग
CM हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 39269106 को L-3 स्तर से ‘स्पेशल क्लोज’ किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने लगातार असंतुष्टि दर्ज कराई, इसके बावजूद शिकायत बंद कर दी गई। अब शिकायतकर्ता जनसुनवाई में पहुंचा और शिकायत को रिओपन कराने तथा वैध स्व-सहायता समूह की MDM पोर्टल पर मैपिंग कराने की मांग की है।
कमीशनखोरी के आरोपों से हड़कंप
मामले में जनपद पंचायत से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों और MDM व्यवस्था से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों पर कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिससे उन्होंने एक्सपायर अनुबंध को वैध का ठप्पा लगा दिया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। हालांकि आरोपों के बीच अब सवाल यह भी उठ रहा है कि MDM कार्य आवंटन और समूह की मैपिंग में किस नियम, किस आदेश और किस रिकॉर्ड को आधार बनाया गया। यदि आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं आर्थिक लेन-देन या अनुचित लाभ के प्रमाण सामने आते हैं तो मामला केवल अनुबंध विवाद न रहकर गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितता की जांच का विषय बन सकता है।
L-3 में शिकायत ‘स्पेशल क्लोज’, अब ‘जांच करा लेते हैं’—अधिकारी के बयान से सवालों का बवंडर
CM हेल्पलाइन की शिकायत L-3 स्तर से पहले ही ‘स्पेशल क्लोज’ की जा चुकी है। इसके बावजूद MDM अधिकारी का “जांच करा लेते हैं” वाला बयान अब पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल सीधा है—जब शिकायत को जांच के बाद बंद माना गया, तो अब दोबारा जांच की जरूरत क्यों पड़ी? यदि शिकायत में जांच योग्य तथ्य मौजूद थे, तो L-3 स्तर पर इसे स्पेशल क्लोज करने का आधार क्या था? और अब जांच किस रिकॉर्ड, किस आदेश और किस प्रक्रिया के तहत होगी? यही विरोधाभास शिकायत निवारण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
अब मूल रिकॉर्ड का आमने-सामने मिलान जरूरी
जांच में CM हेल्पलाइन की पूरी हिस्ट्री, L-3 स्पेशल क्लोज का आधार, MDM पोर्टल मैपिंग और कार्य आवंटन संबंधी दस्तावेजों का मिलान जरूरी है। मामला अब केवल एक समूह के अनुबंध का नहीं है। सवाल सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता, शिकायत निवारण की पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही का है।
अब सवाल सीधे हैं—
नवीनीकरण नहीं मिला तो अनुबंध ‘वैध’ कैसे हुआ?असंतुष्ट शिकायतकर्ता की शिकायत L-3 से स्पेशल क्लोज क्यों हुई? और कमीशनखोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी? और मामले में एक्सपायरी अनुबंध को वैध बताने वाले एवं Mdm स्तर बिना नवीनीकरण के स्व सहायता समूह कैसे संचालित होता रहा ? मामले में  संरक्षण देने या लापरवाह अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग भी की जा रही है, अब जरूरत शिकायत बंद करने की नहीं, मूल फाइल खोलकर सच सामने लाने की है। अब देखना होगा आगे प्रशासन मामले में क्या कार्रवाई करता है, जो कि देखना लाजमी होगा।

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