सुरक्षा ताक पर, मजदूर की गई जान ! पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्माणाधीन भवन में हादसा, परिजनों ने की उचित कार्रवाई की मांग

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रिपोर्ट – शरद गर्ग (दमोह)
दमोह/हटा। नगर के गांधी वार्ड में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के निर्माणाधीन भवन में काम के दौरान करंट की चपेट में आने से 32 वर्षीय मजदूर शरद नामदेव की मौत के बाद मामला गरमा गया है। हादसे ने निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारों की कथित लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने घटना की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने, कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। बताया गया है कि 7 अगस्त को निर्माणाधीन भवन की तीसरी मंजिल पर स्लैब डालने का काम चल रहा था। परिजनों के अनुसार भवन के ऊपर से विद्युत लाइन गुजर रही थी। आरोप है कि इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू करने से पहले विद्युत सप्लाई बंद कराने अथवा लाइन को सुरक्षित दूरी पर हटाने की व्यवस्था नहीं की गई। इसी दौरान शरद करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।
खतरा सामने था, फिर भी चलता रहा निर्माण?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब निर्माण स्थल के ऊपर विद्युत लाइन मौजूद थी तो सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए बिना तीसरी मंजिल पर काम कैसे शुरू कराया गया। क्या विद्युत विभाग को सूचना देकर सप्लाई बंद कराई गई थी? क्या मजदूरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए थे? इन सवालों का जवाब अब जांच में सामने आना चाहिए। परिजनों का आरोप है कि निर्माण शुरू करने से पहले विद्युत लाइन को सुरक्षित कराना और आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी था, लेकिन कथित तौर पर इसकी अनदेखी की गई। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण के भी आरोप
मामले को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। निर्माणाधीन भवन के संबंध में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित राजस्व एवं नगर निकाय अधिकारियों द्वारा मौके की जांच कर भूमि की स्थिति और निर्माण की वैधता स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
मजदूर की मौत के बाद परिजनों का फूटा आक्रोश
हादसे के बाद मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में लोग सिविल अस्पताल पहुंचे। परिजनों ने थाना प्रभारी को एसपी के नाम ज्ञापन सौंपकर कथित लापरवाही की जांच, जिम्मेदारों के खिलाफ मामला दर्ज करने और परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। शरद अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है। एक बच्चा महज सात माह का और दूसरा करीब दो वर्ष का बताया जा रहा है। परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा छिन जाने से परिजनों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
जवाब मांग रहे हैं कई सवाल
मामले में निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था, विद्युत लाइन की स्थिति, बिजली सप्लाई बंद कराने की कार्रवाई, निर्माण की अनुमति तथा कथित अतिक्रमण समेत सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। एक मजदूर की जान चली गई, लेकिन अब सवाल यह है कि इस मौत की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी ? अब देखना होगा प्रशासन की जांच में क्या तथ्य सामने आते  है और मामले में क्या कार्रवाई की जाती है ? बहरहाल परिजन प्रशासन पर न्याय की आस लगाएं हुए है। 
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष का बयान
हालांकि इस संबंध में जब पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने बताया कि करंट से मजूदर की मौत हुई है और निर्माण कार्य ठेके पर दिया गया था। वही शासकीय भूमि के आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने उसे निजी भूमि बताया है। 

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