रनेह थाना क्षेत्र में वायरल वीडियो से बवाल, पुलिस जांच जारी… पर ओबीसी महासभा की कार्यशैली पर उठे सवाल

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दमोह/हटा। रनेह थाना क्षेत्र से एक महिला के साथ अभद्रता और गाली-गलौज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला गरमा गया है। वायरल फुटेज में महिला के प्रति की गई अशोभनीय गालियाँ साफ सुनाई देती हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो ग्राम रमपुरा का है।
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस तुरंत सक्रिय
पीड़ित महिला अनीता काछी 23 नवंबर को थाने पहुँचीं और शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने तत्काल मामला पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी। थाना प्रभारी चंदन सिंह निरंजन के अनुसार विवाद की जड़ सार्वजनिक शौचालय के पास लकड़ियाँ रखने और शासकीय भूमि पर कब्जे के प्रयास से जुड़ा है। आरोप रूपनारायण तिवारी पर लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि विवेचना जारी है, जो तथ्य सामने आएंगे उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रक्रिया में, पर ओबीसी महासभा की सक्रियता पर उठे प्रश्न
जब पुलिस कानूनी प्रक्रिया में लगी है, तब ओबीसी महासभा द्वारा प्रदर्शन, कठोर कार्रवाई की माँग और लगातार राजनीतिक बयानबाज़ी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। महासभा के पूर्व के कई मामलों में भी इसी तरह की राजनीतिक सक्रियता देखी गई है।
पुराने मामलों में दोहरे रवैये के आरोप
पटेरा थाना क्षेत्र के सतरिया गांव के पैर-धुलाई कांड में पीड़ित पुरुषोत्तम कुशवाहा ने प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्टि जताई थी, इस मामले में महत्वपूर्ण यह है कि जिस पानी पीने के मामले को राजनीतिक रंग दिया गया उसका कोई वीडियो ही नहीं है, वायरल वीडियो में केवल पैर धुलाना स्पष्ट प्रतीत हो रहा था, केवल मौखिक बयानबाजी के आधार पर जिले साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया गया।
इसी दौरान सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा के विवादित बयान ‘अगली बार मैला खा लेना’ पर महासभा की चुप्पी भी सवालों में रही, जबकि विधायक स्वयं ओबीसी समुदाय से थे।
पत्रकार पर हमले पर भी संगठन की चुप्पी
दो दिन पूर्व तेंदूखेड़ा में पुलिस प्रेस नोट का विरोध करते हुए युवा पत्रकार पर जाति विशेष के लोगों द्वारा एक पत्रकार पर हमला और जातिसूचक गालियाँ दिए जाने की घटना के बावजूद कोई संगठन सामने नहीं आया। जबकि आरोपित स्वयं ओबीसी समाज से थे, इसमें अन्य पत्रकारों को धमकाने की बात भी सामने आई थी।
प्रदर्शन पर रोक, प्रशासन ने जारी किए थे आदेश
पूर्व में हुए प्रदर्शनों और चक्काजाम की घटनाओं के बाद दमोह कलेक्टर ने जिले में बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन एवं सार्वजनिक रैली पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था और उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
अर्थखेड़ा घटना भी आई थी सुर्खियों में
इसी महीने अर्थखेड़ा गाँव में एक दलित युवक सहदेव अहिरवार को दुकान पर पानी पीने से रोके जाने और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किए जाने का वीडियो वायरल हुआ था। पीड़ित तेजगढ़ थाने में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी। जबकि इसमें भी आरोपित ओबीसी वर्ग से ही थे, जिस पर ओबीसी महासभा की चुप्पी सवालों में रही।
आरोपित रूपनारायण तिवारी ने बताई वास्तविकता
इस बीच रमपुरा प्रकरण में आरोपित रूपनारायण तिवारी ने पूरी तरह भिन्न पक्ष रखते हुए बयान दिया है, कि वीडियो में जो दिख रहा है, वह वास्तविक नहीं है। महिला ने पहले मुझे अपमानित किया, उकसाया और अभद्रता की, जिसका वीडियो महिला ने रिकॉर्ड नहीं किया है। उन्होंने इसे पूरी तरह इसे षड्यंत्र और प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश बताया है। गौरतलब है कि तिवारी सामाजिक सेवा में सक्रिय और क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं, जिन्हें राजनीतिक या व्यक्तिगत कारणों से फँसाने की कोशिश हो सकती है।
अब देखना लाजमी होगा, कि प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई से ओबीसी महासभा की अपेक्षाएँ कितनी मेल खाती हैं, बहरहाल रनेह पुलिस द्वारा विवेचना के आधार पर जांच जारी है। 

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