रिपोर्टर अमित शर्मा (8349348053)
दमोह/तेंदूखेड़ा। ग्राम पंचायत दरौली में विकास कार्यों की फाइलें भले ही आगे बढ़ रही हों, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि इन फाइलों में दर्ज काम जमीन पर कितने दिखाई देते हैं। 15वें वित्त आयोग सहित अन्य मदों से स्वीकृत निर्माण कार्यों को लेकर शिकायत सामने आई है। शिकायत में राशि आहरण और मौके पर निर्माण की स्थिति का मिलान कराने की मांग की गई है, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी जांच और कार्रवाई का कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है।
सीसी रोड—लंबाई कागज पर, हकीकत मौके पर होगी साफ
रोड से लेखा रम्मू के घर तक 200 मीटर और गोकलपुर में शंकर जी मंदिर से रोड की ओर 200 मीटर सीसी रोड के कार्यों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अब असली परीक्षा मौके की है—स्वीकृत लंबाई के मुताबिक निर्माण हुआ या नहीं और जितना काम हुआ, उसके अनुपात में ही भुगतान हुआ या नहीं?
1.96 लाख का चबूतरा, जांच में खुलेगा हिसाब
दरौली में यज्ञशाला मंदिर के पास चबूतरा निर्माण के नाम पर करीब 1.96 लाख रुपये की राशि आहरित किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने मौके पर निर्माण और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज निर्माण और जमीन पर मौजूद निर्माण में कितना अंतर है?
1000 मीटर स्वीकृति, 500 मीटर निर्माण का आरोप
पुलिस से तिगड़ा की ओर 1000 मीटर खाखरी यानी पशु अवरोधक बाउंड्रीवॉल का कार्य प्रस्तावित बताया गया है। शिकायत में आरोप है कि मौके पर करीब 500 मीटर ही निर्माण हुआ। यदि ऐसा है तो शेष कार्य और उसके नाम पर हुए भुगतान का सत्यापन बेहद जरूरी हो जाता है।
वहीं गोपालपुर बग्रास से फुलवारी की ओर स्वीकृत खाखरी बाउंड्रीवॉल का निर्माण नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। काम नहीं हुआ तो राशि कहां और किस आधार पर खर्च हुई—यह सवाल जांच की मेज पर होना चाहिए।
श्मशान घाट सौंदर्यीकरण भी जांच के घेरे में
गोपालपुर श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण के नाम पर राशि आहरण और मौके पर कार्य नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। शिकायत के बाद 10 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन कार्रवाई की तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि शिकायतों की जांच के लिए जिम्मेदार तंत्र आखिर मौके पर कब पहुंचेगा?
मनरेगा में भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल
तेंदूखेड़ा जनपद पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर भी लगातार अनियमितताओं के आरोप सामने आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ता ने एएओ राहुल गांगरा की लंबे समय से पदस्थापना और पंचायतों में मनरेगा कार्यों की निगरानी को लेकर सवाल उठाए हैं।
आरोप है कि कई पंचायतों में मौके पर काम अधूरा या कम दिखाई देता है, जबकि भुगतान और राशि आहरण पूरा होने की स्थिति बताई जाती है। यदि यह दावा सही है तो केवल कागजी रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं—मौके का भौतिक सत्यापन ही असली तस्वीर सामने ला सकता है।
जांच से डर किसे?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पंचायत के सभी कार्य नियमों के मुताबिक हुए हैं तो जांच कराने में देरी क्यों? और यदि शिकायत में दम है तो कार्रवाई अब तक क्यों नहीं?
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए निष्पक्ष जांच में मस्टर रोल, एमबी, भुगतान विवरण, स्वीकृति आदेश और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण का मिलान जरूरी है।
दरौली में अब सवाल सिर्फ निर्माण कार्यों का नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था का है। शिकायत के 10 दिन बाद भी यदि फाइलें ही चलती रहीं और अधिकारी मौके तक नहीं पहुंचे, तो सरकारी विकास कार्यों की पारदर्शिता पर उठते सवालों का जवाब कौन देगा?
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