रिपोर्टर अमित शर्मा (8349348053)
दमोह/पटेरा। सरकारी व्यवस्था में आम नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर दमोह जिले की जनपद पंचायत पटेरा से जुड़े एक मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) से संबंधित अनुबंध को लेकर शिकायतकर्ता दिलीप कुमार पाठक ने आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत करने और जांच प्रतिवेदन का हवाला देने के बावजूद उनकी समस्या का संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ। उनका दावा है कि शिकायत को स्पेशल क्लोज करने के बाद दोबारा बंद कर दिया गया, जबकि अनुबंध और उसके नवीनीकरण से जुड़े सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं।
मामले में सबसे गंभीर आरोप ₹50 हजार की कथित मांग को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने जिला पंचायत के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।
जांच प्रतिवेदन में अनुबंध नवीनीकरण का उल्लेख, फिर कार्रवाई कहां अटकी?
शिकायतकर्ता दिलीप पाठक के अनुसार, उन्होंने मध्यान्ह भोजन के अनुबंध से संबंधित मामले की जांच कराने के लिए जनपद पंचायत पटेरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हालदार मिश्रा को लिखित शिकायत दी थी। अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 13 अगस्त 2026 के जांच प्रतिवेदन, पत्र क्रमांक 1452/एमडीएम/2026-27 में ज्योति स्व-सहायता समूह के अनुबंध का नवीनीकरण नहीं होने का उल्लेख किया गया था।
अब सवाल यह है कि यदि जांच प्रतिवेदन में अनुबंध नवीनीकरण नहीं होने की बात दर्ज थी, तो उसके बाद क्या कार्रवाई की गई? क्या संबंधित अनुबंध की स्थिति की समीक्षा हुई? क्या जिम्मेदारी तय की गई? और यदि शिकायत का निराकरण हो गया था, तो शिकायतकर्ता की असंतुष्टि के बावजूद उसे बंद करने का आधार क्या था?
इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।
शिकायत क्रमांक 39269106 बंद, लेकिन विवाद बरकरार
दिलीप कुमार पाठक ने सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 39269106 को बंद किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि शिकायत को पहले स्पेशल क्लोज किया गया और बाद में फिर बंद कर दिया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने मामले के निराकरण पर असंतुष्टि दर्ज कराते हुए जिला कलेक्टर के स्तर पर जांच और शिकायत को एल-4 स्तर तक भेजने की मांग की थी। इसके बावजूद उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
यदि शिकायतकर्ता की आपत्तियां दर्ज थीं, तो उनका परीक्षण किस स्तर पर किया गया? क्या जांच प्रतिवेदन और अनुबंध से संबंधित दस्तावेजों को शिकायत बंद करने से पहले देखा गया? इन बिंदुओं पर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
₹50 हजार मांगने के आरोप से बढ़ी मामले की गंभीरता
इस प्रकरण में शिकायतकर्ता ने ₹50 हजार मांगने का गंभीर आरोप भी लगाया है। दिलीप पाठक के अनुसार, उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से नोटशीट और कार्रवाई से संबंधित जानकारी भेजी गई थी। उनका दावा है कि उन्हें बताया गया कि कार्रवाई हो चुकी है और अब केवल आदेश जारी होना बाकी है। इसके बाद अगले दिन जिला पंचायत दमोह में ₹50 हजार लेकर आने को कहा गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित रूप से रुपये नहीं देने के बाद ज्योति स्व-सहायता समूह से संबंधित मामले में परीक्षण के लिए जनपद पंचायत पटेरा को दोबारा पत्र जारी किया गया।
अब सवाल यह है कि क्या इस कथित मांग और बाद की प्रशासनिक कार्रवाई के बीच कोई संबंध है?
यह एक गंभीर आरोप है, जिसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। इसकी निष्पक्ष जांच के लिए व्हाट्सएप संदेशों, नोटशीट, पत्राचार और संबंधित अधिकारियों के बयान की जांच आवश्यक है। यदि शिकायतकर्ता साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, तो प्रशासन को नियमानुसार उनका परीक्षण कराना चाहिए।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल, दस्तावेजों की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हालदार मिश्रा, एमडीएम प्रभारी तिलक सिंह चौहान, जिला पंचायत दमोह के एमडीएम प्रभारी प्रभु शंकर पांडे, कंप्यूटर ऑपरेटर भूपेंद्र परिहार और पंचायत समन्वय अधिकारी अंगद सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
दिलीप पाठक का आरोप है कि मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच किए बिना शिकायत बंद की जा रही है। उन्होंने मांग की है कि अनुबंध पत्र, जांच प्रतिवेदन, नोटशीट, प्रस्ताव और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कार्रवाई का रिकॉर्ड जांच के दायरे में लिया जाए।
शिकायतकर्ता ने जिला पंचायत के एमडीएम प्रभारी प्रभु शंकर पांडे के विरुद्ध पूर्व में लोकायुक्त की कार्रवाई होने का दावा भी किया है। हालांकि, इस दावे से जुड़े दस्तावेजों और कार्रवाई की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
कलेक्टर से मांग—शिकायत बंद करने की प्रक्रिया की भी हो जांच
दिलीप कुमार पाठक ने दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केवल अनुबंध तक सीमित न रहे, बल्कि शिकायत के निराकरण, उसे बंद करने के आधार और कथित रुपये मांगने के आरोप की भी जांच की जाए।
उन्होंने मांग की है कि शिकायत क्रमांक 39269106 को दोबारा खोलने पर विचार किया जाए, पूरे प्रकरण की जांच किसी वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल: सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत बंद होना ही क्या निराकरण है?
पटेरा जनपद पंचायत से जुड़े इस मामले में अब कई सवाल प्रशासन के सामने हैं। जांच प्रतिवेदन में अनुबंध नवीनीकरण नहीं होने का उल्लेख होने के बाद क्या कार्रवाई हुई? शिकायतकर्ता की असंतुष्टि का परीक्षण किसने किया? ₹50 हजार मांगने के आरोप की जांच कौन करेगा? और शिकायत बंद करने का निर्णय किन दस्तावेजों के आधार पर लिया गया?
सीएम हेल्पलाइन की विश्वसनीयता केवल शिकायतों को बंद करने से नहीं, बल्कि उनकी समस्या का उचित और पारदर्शी समाधान करने से बनती है।
अब देखना होगा कि दमोह जिला प्रशासन शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए सवालों और प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों की जांच कराता है या नहीं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

