रिपोर्टर अमित शर्मा (8349348053)
दमोह/पटेरा। दमोह जिले की जनपद पंचायत पटेरा में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता दिलीप कुमार पाठक ने जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हालदार मिश्रा सहित जिला पंचायत के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकायत को बिना संतोषजनक निराकरण के बार-बार बंद करने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) से संबंधित अनुबंध की जांच की मांग पर कार्रवाई करने के बजाय उनकी शिकायत को स्पेशल क्लोज और अन्य माध्यमों से बंद कर दिया गया।
जांच प्रतिवेदन में अनुबंध नवीनीकरण नहीं होने का उल्लेख
दिलीप कुमार पाठक के अनुसार, उन्होंने मध्यान्ह भोजन के अनुबंध पत्र के संबंध में जांच कराने के लिए जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हालदार मिश्रा को लिखित शिकायत दी थी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया। शिकायत की जांच जिला पंचायत द्वारा पंचायत समन्वय अधिकारी को सौंपी गई थी।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 13 अगस्त 2026 के जांच प्रतिवेदन, पत्र क्रमांक 1452/MDM/2026-27 में पंचायत समन्वय अधिकारी अंगद सिंह एवं पटेरा सीईओ हालदार मिश्रा की ओर से ज्योति स्व-सहायता समूह के अनुबंध का नवीनीकरण नहीं होना उल्लेखित किया गया है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब जांच प्रतिवेदन में अनुबंध नवीनीकरण नहीं होने की बात सामने आई, तो मामले में आगे क्या कार्रवाई हुई और शिकायत को बंद करने का आधार क्या था?
हालांकि, जांच प्रतिवेदन और शिकायत बंद करने की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
शिकायत क्रमांक 39269106 को बंद करने पर आपत्ति
शिकायतकर्ता दिलीप पाठक का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 39269106 को पहले स्पेशल क्लोज किया गया और बाद में दोबारा बंद कर दिया गया। उनका कहना है कि उन्होंने लगातार असंतुष्टि दर्ज कराई और मांग की कि जांच प्रतिवेदन सहित सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच दमोह कलेक्टर के स्तर से कराई जाए तथा शिकायत को एल-4 स्तर पर भेजा जाए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों के बावजूद मामले का निष्पक्ष निराकरण नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि राजनीतिक संरक्षण के चलते शिकायत को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
दिलीप पाठक ने जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हालदार मिश्रा, एमडीएम प्रभारी तिलक सिंह चौहान, जिला पंचायत दमोह के एमडीएम प्रभारी प्रभु शंकर पांडे, कंप्यूटर ऑपरेटर भूपेंद्र परिहार और पंचायत समन्वय अधिकारी अंगद सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच किए बिना शिकायत को बार-बार बंद किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि शिकायत से संबंधित फाइल, जांच प्रतिवेदन, अनुबंध पत्र और सीएम हेल्पलाइन पर की गई कार्रवाई के रिकॉर्ड की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
50 हजार रुपये मांगने का भी आरोप
मामले में शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। दिलीप पाठक के अनुसार, कुछ दिन पहले उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से नोटशीट और कार्रवाई से संबंधित जानकारी भेजी गई थी। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति की ओर से कहा गया कि कार्रवाई हो चुकी है और अब केवल आदेश जारी होना बाकी है। इसके बाद अगले दिन जिला पंचायत दमोह में 50 हजार रुपये लेकर आने को कहा गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रुपये नहीं देने के बाद ज्योति स्व-सहायता समूह के संबंध में परीक्षण के लिए जनपद पंचायत पटेरा को दोबारा पत्र जारी किया गया। उन्होंने आशंका जताई कि मामले में अनुबंध से संबंधित दस्तावेज तैयार करने या प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में अनियमितता हो सकती है।
यह कथित रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित संदेशों, नोटशीट, पत्राचार और अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक है। फिलहाल इस संबंध में किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
लोकायुक्त कार्रवाई का हवाला देकर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने जिला पंचायत के एमडीएम प्रभारी प्रभु शंकर पांडे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि पांडे के विरुद्ध पूर्व में लोकायुक्त की कार्रवाई हुई थी और इसके बावजूद उन्हें दोबारा एमडीएम का प्रभार सौंपा गया।
दिलीप पाठक ने मांग की है कि यदि पूर्व में लोकायुक्त की कार्रवाई हुई थी, तो उसके दस्तावेजों और वर्तमान प्रभार सौंपने के आधार की जांच की जाए। हालांकि, पूर्व कार्रवाई की प्रकृति, उसकी आधिकारिक स्थिति और वर्तमान जिम्मेदारी से संबंधित तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी स्वयं को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का करीबी बताकर प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
दिलीप कुमार पाठक ने दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान करना है, न कि बिना संतोषजनक निराकरण के शिकायतों को बंद करना।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें हैं कि सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 39269106 को दोबारा खोला जाए, पूरे प्रकरण की जांच वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए, मध्यान्ह भोजन से संबंधित अनुबंध और नवीनीकरण के दस्तावेजों की जांच हो तथा कथित रिश्वत मांगने के आरोप की भी जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल: शिकायत का समाधान हुआ या सिर्फ रिकॉर्ड में बंद हुई?
पटेरा जनपद पंचायत से जुड़े इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब शिकायतकर्ता जांच प्रतिवेदन का हवाला देकर असंतुष्टि जता रहा है, तो शिकायत बंद करने का आधार क्या था? क्या संबंधित दस्तावेजों का विधिवत परीक्षण किया गया? क्या 50 हजार रुपये मांगने के आरोप की जांच होगी? और क्या जिला प्रशासन सभी संबंधित अधिकारियों का पक्ष लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा?
अब निगाहें दमोह जिला प्रशासन पर हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और दस्तावेजों की जांच सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।


