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रिपोर्टर अमित शर्मा (8349348053)
ग्राम पंचायत मुडारी में ₹23 लाख की सीसी रोड पर सवाल, ₹13.95 लाख के भुगतान के बाद भी सड़क गायब होने का आरोप!
सरकारी खजाने से निकली लाखों की रकम, फिर निर्माण कहां? मुडारी पंचायत के मामले में जांच हुई तो खुल सकता है भुगतान और निर्माण का पूरा हिसाब!
दमोह/जबेरा। सरकारी योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के दावों के बीच जब जमीन पर विकास कार्य दिखाई नहीं देते, तो जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला दमोह जिले के जबेरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मुडारी से सामने आया है। यहां सीसी रोड निर्माण के लिए करीब 23 लाख रुपये की राशि स्वीकृत होने और 13 लाख 95 हजार रुपये का भुगतान निकाले जाने की जानकारी सामने आ रही है। लेकिन आरोप है कि मौके पर सड़क निर्माण कार्य दिखाई नहीं दे रहा। यदि यह दावा जांच में सही साबित होता है, तो सवाल उठेगा कि आखिर सरकारी राशि किस काम पर खर्च हुई?
🔥 23 लाख की स्वीकृति, ₹13.95 लाख का भुगतान—फिर सड़क कहां?
ग्राम पंचायत मुडारी में सीसी रोड निर्माण के नाम पर स्वीकृत राशि को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य के लिए लाखों रुपये का भुगतान हो चुका है, लेकिन मौके पर सड़क की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण कार्य हुआ है, तो उसकी जमीनी तस्वीर कहां है? और यदि काम अधूरा है या हुआ ही नहीं, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
इन सवालों का जवाब केवल कागजी रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि मौके के भौतिक सत्यापन और तकनीकी जांच से ही मिल सकता है।
⚡ राजनीतिक रसूख की चर्चा, सरकारी धन के हिसाब पर खामोशी क्यों?
जबेरा ब्लॉक की कुछ ग्राम पंचायतों में राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की ठेकेदारी और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चाएं सामने आती रही हैं। मुडारी पंचायत के मामले में भी राजनीतिक नजदीकियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के करीबी बताए जाने वाले कुछ लोगों को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, किसी व्यक्ति की राजनीतिक नजदीकी अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। जरूरत इस बात की है कि जांच राजनीतिक पहचान देखकर नहीं, बल्कि दस्तावेजों, भुगतान और निर्माण की वास्तविक स्थिति के आधार पर हो।
💥 कागजों में विकास या जमीन पर हकीकत—अब जांच जरूरी!
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें जनता की सुविधा के लिए बनती हैं। यदि सड़क निर्माण के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान हुआ है, तो उसकी वास्तविक स्थिति सामने आनी ही चाहिए। 
23 लाख की स्वीकृति और ₹13.95 लाख के भुगतान का हिसाब जनता जानना चाहती है। यदि निर्माण कार्य मौके पर नहीं हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं, यदि कार्य हुआ है, तो प्रशासन को उसकी स्थिति और गुणवत्ता स्पष्ट करनी चाहिए।
अब देखना होगा—जांच होगी या मामला फाइलों तक सीमित रह जाएगा?
ग्राम पंचायत मुडारी के इस मामले में अब जिला पंचायत सीईओ दमोह और जनपद पंचायत सीईओ जबेरा की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि तथ्यों पर आधारित जांच और पारदर्शी कार्रवाई चाहिए।

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