रिपोर्टर अमित शर्मा (8349348053)
दमोह/जबेरा। जबेरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत कटंगी में विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामवासियों ने पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर राशि खर्च होने के बावजूद कई निर्माण कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारी धन का उपयोग किस तरह किया जा रहा है और इन कार्यों की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं?
लाखों की राशि स्वीकृत, लेकिन निर्माण अधूरे!
ग्रामीणों के अनुसार, पांचवें वित्त आयोग की राशि से करीब 5 लाख 87 हजार रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण कराया जाना था, लेकिन आरोप है कि राशि खर्च होने के बावजूद काम अधूरा है। वहीं, पांचवें वित्त आयोग से ही करीब 3 लाख 90 हजार रुपये के एक अन्य सीसी निर्माण कार्य को लेकर भी अधूरे निर्माण की शिकायत सामने आई है।
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत करीब 24 लाख 70 हजार रुपये की लागत वाले सीसी रोड निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने काम अधूरा होने का आरोप लगाया है। यदि इन कार्यों की राशि जारी या खर्च की जा चुकी है, तो निर्माण की वर्तमान स्थिति, भुगतान और मूल्यांकन की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
40 प्रतिशत कमीशन का आरोप, इंजीनियर की भूमिका पर सवाल!
मामले में ग्रामीणों ने इंजीनियर पावस सोनकर पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन के चलते निर्माण कार्यों का मूल्यांकन वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य अधूरे बताए जा रहे हैं, तो उनका मूल्यांकन किस आधार पर किया गया? क्या मौके पर जाकर निर्माण की गुणवत्ता और पूर्णता की जांच की गई? यदि कार्य अधूरे हैं, तो भुगतान की स्थिति क्या है? और यदि मूल्यांकन में अनियमितता हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
पंचायत की कमान भाजपा नेताओं के हाथ में होने का ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत कटंगी की व्यवस्था पर भाजपा नेताओं का प्रभाव है। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। सवाल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पंचायत के कामकाज, सरकारी धन की पारदर्शिता और ग्रामीणों को मिलने वाली विकास सुविधाओं का है।
जिला प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत कटंगी के कथित अधूरे निर्माण कार्यों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। संबंधित निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच, स्वीकृत राशि, भुगतान विवरण, माप पुस्तिका और मूल्यांकन रिपोर्ट का मिलान किया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इंजीनियर पावस सोनकर की भूमिका और पंचायत के निर्माण कार्यों की जांच कराएगा? क्या अधूरे कार्यों के लिए जिम्मेदारी तय होगी, या सरकारी धन के उपयोग पर उठ रहे सवाल फाइलों में ही दबकर रह जाएंगे?



