रिपोर्टर : अमित शर्मा (8349348053)
दमोह। दमोह जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा, और अब इसकी सीधी आंच आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) विभाग पर आती दिख रही है। जनपद पंचायत जबेरा अंतर्गत ग्राम पंचायत सुरई में अमृत सरोवर योजना की जमीनी हकीकत ने विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है।
करीब 48 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत अमृत सरोवर वर्षों बाद भी अधूरा पड़ा है। हालात यह हैं कि तालाब का मूल ढांचा तक पूरा नहीं किया गया, जबकि कागजों में योजना को आगे बढ़ा हुआ दिखाया जा रहा है। इससे न केवल कार्यों की गुणवत्ता बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक आरईएस विभाग में कार्यों की स्वीकृति से लेकर माप और भुगतान तक की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। आरोप हैं कि कई मामलों में अधूरे या शुरू तक न हुए कार्यों के लिए भी भुगतान जारी कर दिया गया। यह स्थिति सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितता और सिस्टम की कमजोर निगरानी को दर्शाती है।
वही तत्कालीन एसडीओ बी.एल. साहू के कार्यकाल में तेंदूखेड़ा और जबेरा ब्लॉक में 22 सड़कों को स्वीकृति दी गई और सामग्री मद का भुगतान भी निकाल लिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका। इससे विभागीय जिम्मेदारी और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह पूरा मामला केवल एक योजना की विफलता नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर गहरी गड़बड़ी की ओर संकेत करता है। अधूरे निर्माण, बिना काम भुगतान और गुणवत्ता की अनदेखी—ये सभी तथ्य एक बड़े सिस्टम फेलियर की तस्वीर पेश करते हैं।
लोगों के बीच अब यह धारणा बनती जा रही है कि सरकारी योजनाएं जमीनी विकास के बजाय कागजी उपलब्धियों तक सीमित होकर रह गई हैं। ऐसे में जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।




