October 17, 2026

*आस्था एवं आराधना का दिव्य स्थल माँ कलेही मंदिर पवई:* आस्था, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम पवई, जिला पन्ना। विंध्य पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसे मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पवई तहसील का नाम जुबां पर जैसे ही आता है तो जेहन में आता है दिव्य शक्ति स्वरूपा मां कलेही का दिव्य दर्शन सामने आता है। वैसे तो शक्तिरुपा नारायणी के अनेक रूप हैं, दुर्गा सप्तशती में वर्णित नव देवियों में माँ कलेही सातवीं देवी मां कालरात्रि ही है। अष्ठ भुजाधारी मां के हाथों में शंख, चक्र, गदा, पदम, तलवार एवं त्रिशूल सुशोभित है। पैरों के निकट त्रिलोकीनाथ भगवान शिव हैं। उनके दाएं भाग में हनुमान जी महाराज तथा बाएं भाग में बटुक भैरव नाथ विराजमान हैं एवं हाथ में भाला लिए हुए मां भगवती महिषासुर मर्दन कर रही हैं। यह विलक्षण अद्भुत प्रतिमा लगभग साढ़े तेरह सौ वर्ष पुरानी है जिसकी स्थापना विक्रम संवत 700 में हुई थी। पवई नगर से लगभग 2 कि.मी. की दूरी पर पतने नदी के तट पर स्थित है मां कलेही मंदिर जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यूं तो यहां वर्ष भर श्रृद्धालुओं का तांता लगा रहता है परन्तु वर्ष की शारदीय एवं वासंतिक (चैत्र) नवरात्र पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं। ➡️*प्राचीन मेला:* चैत्र नवरात्र पर यहां विशाल मेला लगता है जिसमें दूर-दूर से व्यापारी मेले में व्यवसाय करने के लिए आते हैं। चैत्र नवरात्र में लगने वाले मेले का प्रमाण तकरीबन 500 वर्ष पुराना है। प्राचीन समय में इसी मेले के माध्यम से वर्ष भर के लिए अनाज, तेल मसाले एवं दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुओं की खरीद फरोख्त की जाती थी। मेले में मीना बाजार, झूले, नाटक-नोटंकी, मौत का कुंआ लोगों का विशेष आकर्षण एवं मनोरंजन का केंद्र होते हैं। ➡️*देश के सभी अंचलों से आते हैं दर्शनार्थी:* यहां सम्पूर्ण भारत के सभी अंचलों जैसे- बुंदेलखंड,बघेलखंड,मालवा निमाड़, महाकौशल आदि अंचलों से यहां श्रृद्धालु मां से मन्नत मांगने के लिए आते हैं जिसका प्रमाण आज भी सिद्ध स्थल श्री हनुमान भाटे की सीढ़ियों पर नाम एवं पता के साथ अंकित है। ➡️*जनश्रुति एवं लोक मान्यताएं:* लोक मान्यताओं के अनुसार मां शारदा देवी मैहर, मां पद्मावती देवी पन्ना एवं मां कलेही देवी पवई की प्रतिमाएं हवा में 90° अंश का कोण बनाती हैं साथ ही हवा में भी इन पवित्र स्थलों की दूरी लगभग 60 कि.मी. है। धन धान्य की परिपूर्णता और शक्ति के प्रतीक के रूप में मां कलेही की उपासना सदैव प्रचलित रही है। मां कलेही का मुखमंडल सदैव विशेष चमक विखेरता है। यह अद्वितीय पाषाण प्रतिमा भारतीय शिल्प कला का अद्भुत एवं अनूठा उदाहरण है। ➡️*अखण्ड ज्योति का विशेष महत्व:* नवरात्र के नव-दिवस मां कलेही के सम्मुख अखंड ज्योति भी इसी कामना के साथ प्रज्वलित की जाती है कि मां की साधना में कोई विघ्न बाधा न आए। ➡️*लाल चुनरी एवं श्री फल* प्राचीन समय से चली आ रही मां कलेही में श्रृद्धालुओं की आस्था का प्रमाण मंदिर परिसर के परिक्रमा में लाल चुनरी में बंधे हजारों श्रीफल हैं। यहां भक्त अपनी मुरादें लेकर आते हैं और सच्चे मन से मां की आराधना करके श्री फल को लाल चुनरी में लपेटकर बांध देते हैं और मन्नत पूरी होने पर चुनरी को खोलकर मनोकामना पूर्ण होने का शुभ संकेत देते हैं। ➡️*कन्या भोज एवं नि: शुल्क भण्डारा* नवरात्र में यहां कन्या भोज कराने वालों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। विगत 25 वर्षों से जनसहयोग एवं नगर के युवाओं के अथक प्रयास से मां कलेही प्रांगण में नि: शुल्क कन्या भोज एवं भण्डारा का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी का वितरण किया जाता है। ➡️*बुन्देलखण्ड की प्राचीन परम्परा जवारों का विशेष महत्व:* नवरात्र में यहां जवारों का विशेष महत्व है। एक समय तो यहां मां मैहर की शारदा देवी व पन्ना की फूला माता समेत तकरीबन डेढ़ सौ गांवों से जवारे मां कलेही धाम आते थे। भक्त अपने सर पर जवारों को रखकर ढोल मंजीरों की थाप पर देशी भगतों का गायन कर हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं जैसे – बानों और त्रिशूल के द्वारा गले को छेदना। तलवारों को हवा में लहराकर करतब बाजियां दिखाना। जवारों की यह प्राचीनतम धार्मिक परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास हम सनातनियों को करना चाहिए। ➡️*विशेष:* मंदिर परिसर में मां कलेही दरबार के साथ-साथ मुख्य द्वार के बांयी तरफ श्री हनुमान जी महाराज की छ: रूद्री प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर में ही अति प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। ऐसा शिवलिंग भारत में अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। विंध्य पर्वत की तलहटी में 27 फिट के बाबा कैलाशी विराजमान हैं जिनकी जटाओं से अविरल मां गंगा का प्रवाह होता है। बाबा कैलाशी का स्थान जो युवाओं को अनायास ही अपने ओर आकर्षित करता है। ➡️पुरातत्व विभाग की उपेक्षा का शिकार मंदिर और आस-पास के क्षेत्रों में फैली पुरातत्व महत्व की चंदेलकालीन मूर्तियों के अवशेष हैं जिन्हें सहजने एवं संवारने की आवश्यकता है। ➡️मंदिर परिसर एवं आसपास के धार्मिक स्थलों में स्थापित प्रतिमाएं श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार यहां 27 फीट ऊंची शिव प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक वातावरण इस स्थान को पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है। ➡️*पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल:* माँ कलेही मंदिर धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं वाला स्थल है। यहां के प्राकृतिक दृश्य, विंध्य पर्वत श्रृंखला, हरियाली और पतने नदी की अविरल जलधारा पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। मंदिर परिसर को बेहतर सुविधाओं से विकसित करने और ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत के संरक्षण पर ध्यान दिया जाए, तो क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। माँ कलेही मंदिर पवई की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और प्राकृतिक सुंदरता का ऐसा संगम है, जिसे संरक्षित और विकसित करना क्षेत्र की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।