थाना घेराव, हवालात से फरारी और सवालों के बीच घोड़े पर विदाई! रनेह थाना प्रभारी रहे चंदन सिंह के विदाई सम्मान पर उठे तीखे सवाल

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दमोह से शरद गर्ग की खास रिपोर्ट
दमोह/हटा। हटा अनुविभाग के रनेह थाना प्रभारी रहे चंदन सिंह निरंजन का तबादला होने के बाद उन्हें घोड़े पर बैठाकर दी गई भव्य और भावभीनी विदाई अब क्षेत्र में चर्चा से ज्यादा सवालों का विषय बन गई है। विदाई की तस्वीरें सामने आते ही उनके कार्यकाल से जुड़े पुराने घटनाक्रम फिर चर्चा में हैं। सवाल यह नहीं कि विदाई क्यों दी गई, बल्कि सवाल यह है कि जिस कार्यकाल में पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे, उसका समापन आखिर इतनी शाही विदाई के साथ क्यों हुआ? चंदन सिंह निरंजन के कार्यकाल में दो बार थाना घेराव और विरोध प्रदर्शन जैसी परिस्थितियां बनने की चर्चाएं सामने आईं। वहीं थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े चोरी, गोलीबारी, झगड़े और शराबखोरी से जुड़े मामले सामने आने की बातें भी सामने आती रहीं। इन घटनाक्रमों के बीच पुलिस की सक्रियता और अपराध नियंत्रण को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे।
हवालात से फरारी—तीन निलंबित, थाना प्रभारी को नोटिस, लेकिन जवाबदेही का अंत कहां?
रनेह थाना की हवालात से पुलिस अभिरक्षा में बंदी के हथकड़ी तोड़कर फरार होने की घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया था। मामले में पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया। वहीं थाना प्रभारी चंदन सिंह निरंजन और एएसआई/विवेचक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया तथा विभागीय जांच की बात भी सामने आई थी। हालांकि फरार बंदी को बाद में पुलिस टीम द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन बंदी का पुलिस अभिरक्षा से फरार हो जाना अपने आप में गंभीर सुरक्षा चूक थी। गिरफ्तारी से आरोपी तो पुलिस की गिरफ्त में आ गया, लेकिन हवालात की सुरक्षा में हुई चूक और उसकी जिम्मेदारी का सवाल गिरफ्तारी के साथ खत्म नहीं हुआ। अब सवाल सीधा है— कि विभागीय जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या रहा? जिम्मेदारी किस स्तर तक तय हुई? या जांच अब भी फाइलों में चल रही है?
दो बार थाना घेराव—फिर घोड़े पर सम्मान की सवारी !
चंदन सिंह निरंजन के कार्यकाल में दो बार थाना घेराव जैसी परिस्थितियां बनने की चर्चा रही। थाना परिसर में विरोध और प्रदर्शन की नौबत आना पुलिस-जनता के बीच संवाद, विश्वास और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। लेकिन अब उसी कार्यकाल के अंत में घोड़े पर बैठाकर शाही अंदाज में विदाई दी गई। यही तस्वीर अब चर्चा का सबसे बड़ा कारण है। व्यक्तिगत संबंध और आत्मीय सम्मान अपनी जगह हैं, लेकिन क्या किसी अधिकारी की विदाई के साथ उसके पूरे कार्यकाल की जवाबदेही भी नहीं देखी जानी चाहिए? यदि थाने के बाहर जनता विरोध में खड़ी हुई, थाने के भीतर सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक हुई और विभाग को अधीनस्थ कर्मचारियों पर कार्रवाई करनी पड़ी, तो फिर कार्यकाल की उपलब्धियों और कमियों की निष्पक्षता अब आमजन के मन में सवालों की बौछार उठने लगी है।
दिनदहाड़े चोरी, गोलीबारी, झगड़े और शराबखोरी की चर्चाएं
रनेह थाना क्षेत्र में कार्यकाल के दौरान दिनदहाड़े चोरी, गोलीबारी, आपसी झगड़े और शराबखोरी से जुड़े मामले सामने आने की चर्चाएं रहीं। इन घटनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर पुलिस की सक्रियता और अपराध नियंत्रण पर सवाल उठते रहे। वहीं, सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में अवैध शराब, जुआ और सट्टे की गतिविधियों को लेकर आमजन के बीच चर्चाएं और जानकारी होने की बात कही जाती रही, लेकिन इन पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर सवालिया निशान भी उठते रहे। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, लेकिन सवाल यह है कि यदि ऐसी गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंच रही थी, तो कार्रवाई कितनी हुई? जनता के बीच चर्चा यदि लगातार बनी रही, तो पुलिस की खुफिया व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
औचक निरीक्षण में सामने आई लापरवाही, फिर भी सवाल कायम
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के औचक निरीक्षण के दौरान रनेह थाने की व्यवस्थाओं को लेकर भी लापरवाही सामने आई थी। सीसीटीएनएस, मालखाना, हवालात, रिकॉर्ड संधारण और थाना परिसर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया था। लापरवाही पाए जाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी हुई। इसके बाद हवालात से बंदी का फरार होना यह सवाल खड़ा करता है कि पहले सामने आई कमियों से आखिर कितना सबक लिया गया? अगर निरीक्षण के बाद भी ऐसी गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई, तो फिर निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी—यह सवाल भी अनदेखा नहीं किया जा सकता।
विदाई शाही, लेकिन सवाल अभी बाकी
किसी पुलिस अधिकारी का तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया है और सहयोगियों द्वारा विदाई देना भी सामान्य परंपरा है, लेकिन जब उसी कार्यकाल में थाना घेराव, कानून-व्यवस्था से जुड़े विवाद, पुलिस व्यवस्था पर सवाल और अभिरक्षा से बंदी फरार होने जैसी घटनाएं चर्चा में रही हों, तब भव्य विदाई कई सवालों को जन्म देती है। क्या कार्यकाल में उठे सवालों की पूरी समीक्षा हुई ? क्या निलंबित कर्मचारियों के साथ जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला तय हुई थी ? और सबसे बड़ा सवाल—क्या जवाबदेही सिर्फ उस कर्मचारी की होती है जो ड्यूटी पर मौजूद था, या उस व्यवस्था की भी होती है जिसकी निगरानी और कमान वरिष्ठ स्तर पर होती है? घोड़े पर विदाई की तस्वीर भले ही शाही हो, लेकिन सवालों को घोड़े की रफ्तार से पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। तबादला हो गया। विदाई हो गई। सम्मान भी मिल गया। लेकिन रनेह थाना के कार्यकाल से जुड़े सवाल अभी भी वहीं खड़े हैं। पूछता है दमोह—घोड़े पर बैठाकर विदाई तो दे दी गई, लेकिन कार्यकाल में उठे सवालों का हिसाब कौन देगा? जो कि यह चर्चाएं अब क्षेत्र में लगातार शोर मचा रही है।

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